झाबुआ। पेटलावद के इतिहास में 12 सितंबर को काले दिन के नाम से जाना जाता है,जो कल गुरुवार को चौथी बरसी के रूप में मनाया जा रहा है। 12 सितंबर 2015 शनिवार का वह मनहुस दिन जिसने पेटलावद हीं नहीं अर्तराष्ट्रीय स्तर पर रहने वाले प्रत्येक जन मानस की अंतर आत्मा को झकझोर कर रख दिया था। यहीं वह काला दिन है जिस दिन ब्लास्ट में पेटलावद क्षेत्र के 78 लोग अचानक काल के ग्रास बन गयें थे और सेंकड़ो लोग घायल हो गयें थे, जिनकी स्थिती आज भी दयनिय बनी हुई है।

यह था मामला -
वर्ष 2015 में 12 सितंबर शनिवार को सुबह 8:15 बजें पेटलावद के नया बस स्टेण्ड स्थित एक मकान के अंदर से लोगो ने धुआ निकलते देखा और भिड़ ने इक्ट्ठी होकर जब मकान की शटर को खोला तो अचानक हुयें ब्लास्ट से लोगो के चिथडे उड गए और पुरे क्षेत्र में लाशें ही लाशें बिछ गई। यह घटना जो कि जिलेटीन की छड़ में हुयें ब्लास्ट से हुई थी जिसने पुरे प्रशासन को हिलाकर रख दिया था। इस घटना में शासन की और से 78 लोगो के मृत होने की पुष्टी होने के साथ हीं लगभग 100 से अधिक लोगो के घायल होने की पुष्टी की गई थी। यहां तक की ब्लास्ट इतना खतरनाक था कि लोगो को उनके परिजनों की लाश तक नहीं मिली और शरीर के चिथड़ों का अंतिम संस्कार परिजनों ने नम आंखों से किया। इस ब्लास्ट में अकेले पेटलावद नगर के शमशान में एक साथ 32 से अधिक लाशों का अंतिम संस्कार हुआ था। इस ब्लास्ट ने कई बच्चों को उनके पिता से तो कई माताओं को उनके पुत्र व पत्नियों को उनके पति से अलग कर दिया। जो कि आज भी इस विभस्त मंजर को याद करके अनायास थर्रा उठते है।

पुलिस व प्रशासन पर हुई कार्रवाहीं -
राजनितिक गलियारों में दबाव  के चलते तत्कालिन एसडीओ पुलिस सहित पुरे पेटलावद थाने व राजस्व विभाग के एसडीओं को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया और पिडीतो की और से पुलिस थाने पर 4 से 5 विभिन्न आपराधिक प्रकरण जरूर पंजिबंद्ध कियें गयें लेकिन मुख्य आरोपी राजेन्द्र कांसवा को आज भी पुलिस व प्रशासन मृत मानती है, लेकिन पिड़ित परिवार उसे जिवीत मानते है और यह एक ऐसी अनसुलझी पहेली है जो इन 4 सालों में भी हल नहीं हो पाई।
वादे जो नहीं हुए पुरे -
ब्लास्ट कांण्ड की जांच के लिए तत्कालिन भाजपा सरकार के द्वारा हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज आर्येन्द्र सक्सेना की अध्यक्षता में न्यायिक जांच आयोग गठीत किया गया था। और इस आयोग ने ब्लास्ट काण्ड की जांच करके तत्कालिन भाजपा सरकार को सुपुर्द भी कर दी है लेकिन न तो भाजपा व वर्तमान की कांग्रेस सरकार ने इन 4 सालों में इस रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया है। ब्लास्ट पिडितो की माने तो दोनों हीं दलों की सरकारों की यदी मंशा साफ है तो इस रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

स्मारक जो बन नहीं पाया -
तत्कालिन मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के द्वारा ब्लास्ट में मृत हुए लोगो की याद में पेटलावद में शहींद स्मारक बनायें जाने की सार्वजनिक घोषणा की थी लेकिन आज तक यह घोषण सिर्फ कागजों में हीं दबकर रह गई है, पिड़ित परिवारों ने मांग है कि यदी सरकार घोषणा पुरी नहीं कर सकती तो उसे वादे करने का भी कोई अधिकार नहीं है।

आरोपी का परिवार हुआ रिहा, नहीं कर पाई सरकार अपील -
आनन फानन में पुलिस के द्वारा ब्लास्ट काण्ड के समय एफआईआर तो दर्ज ली लेकिन पिड़ित परिवारों की अपेक्षा आरोपी को बचाने की मंशा ज्यादा दिखी और इसिलीए पुलिस और प्रशासन ने इतने कमजोर केस बनायें की मुख्य आरोपी राजेन्द्र कांसवा तो आज भी पुलिस की फाईल में मृत है और उसके परिजन भी वर्ष 2018 के अंत में झाबुआ न्यायालय से बरी होने में सफल रहे, इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस शासीत वर्तमान सरकार ने यह आश्वस्त किया था कि झाबुआ कोर्ट के फेसले के विरूद्ध सरकार उच्च न्यायालय मे अपील करेगी लेकिन फेसला होने के लगभग 5 माह बाद भी सरकार व प्रशासन की और से इस और कोई कार्रवाहीं नही करना वर्तमान कांग्रेस सरकार व स्थानिय प्रशासन की मंशा पर सवालिया निशान खड़ा करता है। विधि विशेषज्ञो की माने तो इस क्षेत्र में सरकार चाहे तो झाबुआ कलेक्टर की अनुशंसा पर पूनः मामले को हाई कोर्ट ले जा सकती है, लेकिन लोकसभा चुनाव के खत्म होते हीं कांग्रेसी सरकार इस मुद्दे से पिछा छुडाना चाहती है।

कांग्रेस की घोषणा भी अुधरी -
ब्लास्ट काण्ड के समय कांग्रेस पार्टी मध्य प्रदेश में विपक्षी पार्टी के रूप में थी और भाजपा के शासन काल में हुए इस ब्लास्ट काण्ड का कांग्रेस ने पुरजोर विरोध करते हुए तत्कालिन सरकार के द्वारा मृतको के परिजनों को दी जाने वाली सहायता नोकरी, कर्जमाफी व 5 लाख रूपयं की आर्थिक सहायता को कम बताते हुए कांग्रेस की सरकार आने पर अधिक मुआवजा व स्थाई नोकरी तथा कर्जमाफी का वादा किया था और पिछले वर्ष 12 सितंबर 2018 को विधानसभा चुनाव से एन वक्त पूर्व आयें मुख्यमंत्री कमलनाथ ने खुले मंच से दोषियों के खिलाफ कार्रवाहीं और पिडीतो के परिवार को स्थाई नोकरी देने का वादा किया था, लेकिन कमलनाथ की कांग्रेस सरकार को अस्तीत्व में आयें हुए 10 माह का समय हो गया लेकिन अब तक अपनी घोषणाओं पर अमल नहीं कर पायें।

आज भी काट रहे दफ्तरों के चक्कर -
इन्हीं मे से एक पिडीत प्रदीप परवार ने बताया कि मेरे भाई का ब्लास्ट में स्वर्गवास हो गया था और भाजपा सरकार ने मेरे भाई के बैंक के दो लाख के कर्जे को माफ करने के लिए घर आकर आश्वास्त किया था लेकिन कर्ज माफी के स्थान पर बैंक ने साढे तीन लाख की वसुली का नोटीस दे दिया है। वहीं अनमोल पंवार ने बताया कि सरकार ने जो आर्थिक सहायता और स्थाई नोकरी देने का वादा किया था वह आज भी अधुरा है, इस तरह से माने तो पिडीत परिवारों के लिए सरकार की घोषणाएं आज भी कागजों में दबी है और मृतको के परिजन आज भी स्थाई नोकरी के लिए सरकारी दफतरों के चक्कर लगाते फिर रहे है।

चैथी बरसी पर होगी श्रद्धांजली -
अपने परिजनों व घर के मुखियाओं के जाने का दर्द पिडित परिवार आज भी भुल नहीं पा रहा है, और उनकी याद में पिड़ित परिवारों के द्वारा स्थानिय श्रद्धांजली चौक पर प्रतिवर्ष अनुसार इस वर्ष भी श्रंद्धांजली दी जावेगी। वहीं नगर की कई सामाजिक संस्थाओं व स्कुलों की और से भी श्रंद्धांजली दी जावेगी। वहीं पेटलावद के नवयुवकों द्वारा बनाया गया अपना ग्रीन पेटलावद संगठन की और से मृतको की याद में 78 पोधों का वृक्षारोपण करने और उनकी देखभाल का संकल्प भी लिया जाएगा।

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