भोपाल। राज्यपाल श्री लालजी टंडन ने कहा है कि जब हम अपने देश के पुरातन इतिहास का अध्ययन करते हैं, तो पाते हैं कि हमारे ऋषियों-मुनियों ने प्रकृति की छाया में बैठकर ज्ञान परम्परा को प्रतिष्ठापित किया। यहीं से श्रुति-स्मृति परम्परा की शुरूआत हुई। पीढ़ी दर पीढ़ी यही चिंतन, श्रुति और स्मृति के रूप में हमारे बीच मौजूद है। इस संपदा को बार-बार नष्ट करने की कोशिश की गई परंतु भारतीय संस्कृति, संस्कार और परम्परा ने इसे नष्ट होने से बचाया। श्री टंडन आज यहाँ दो दिवसीय यंग थिंकर्स कॉनक्लेव में युवा चिंतकों को सम्बोधित कर रहे थे। श्री लालजी टंडन ने कहा कि किसी भी देश के जीवन-काल में विपरीत परिस्थितियाँ आती हैं। भारत में भी कुछ समय के लिये चिंतन के अभाव में विकृतियाँ पैदा हुई, परंतु अब समय आ गया है कि आज के युवा उस चिंतन, श्रुति-स्मृति परम्परा और देश की बहुमूल्य ज्ञान-सम्पदा को आत्मसात कर अपने लक्ष्यों को प्राप्त करें। राज्यपाल ने कहा कि आज हम पेपरलेस व्यवस्था की बात करते हैं परंतु हमारे देश में तो बरसों पहले से ही पेपरलेस व्यवस्था रही है। कबीर जैसे चिंतक निरक्षर थे परंतु उनकी ज्ञान-धारा पर आज भी शोध हो रहे हैं। भारतीय उच्च शिक्षा संस्थान के चेयरपर्सन श्री कपिल श्रीवास्तव ने बताया कि वे अंग्रेजी के प्रोफेसर थे। जब जे.एन.यू में पाणिनि, भृर्तहरि और पतंजलि के बारे में सुना, तो अध्ययन- अध्यापन की धारा ही बदल गई। फिर इन महान ऋषियों के बारे में पढ़ाना शुरू किया। कानक्लेव के निदेशक श्री आशुतोष सिंह ठाकुर ने बताया कि भारतीय ज्ञान परम्परा और औपनिवेशिकता से भारतीय मानस की मुक्ति को लेकर समसामयिक परिवेश में पुन-र्जागरण जरूरी है। उन्होंने बताया कि देश-विदेश से लगभग 150 युवा कॉनक्लेव में शामिल हुए हैं। ये युवा दो दिवसीय आयोजन में कृषि, विज्ञान, भारतीय ज्ञान-परम्परा सहित भारत की दशा और दिशा के संबंध में मंथन करेंगे। समाजसेवी श्री अमिताभ सोनी के नवाचारों पर केन्द्रित डाक्यूमेंट्री फिल्म दिखाई गई। इंदिरा गांधी कला केन्द्र दिल्ली के न्यासी श्री भरत गुप्ता, आरजीपीवी के कुलपति प्रो. आनंद सिंह और पीपुल्स ग्रुप के निदेशक श्री मयंक विश्नोई विशेष रूप से उपस्थित थे।

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