झाबुआ। वर्तमान में जिले सहित प्रदेश की नजर खासकर झाबुआ विधानसभा उप चुनाव पर टिकी है। झाबुआ विधानसभा सीट को भाजपा-कांग्रेस अपने पक्ष में हासिल करने के लिए जी जान से जुट चुकी है। इस सीट के लिए चुनाव आयोग ने आचार संहिता लागु कर दी है। कांग्रेस-भाजपा सहित अन्य राजनितिक दल इस उपचुनाव को लेकर तैयारियों में जुट चुके है, लेकिन दोनो हीं पार्टी में टिकट के लिए अभी भी स्थिती स्पष्ट नहीं हो पाई है कि किसको टिकट देकर मेदान में उतारा जाए। भाजपा की और से भाजयुमों जिलाध्यक्ष भानु भूरिया सहित पेटलावद विधानसभा सीट से विधायक रहीं पूर्व विधायक निर्मला भूरिया व पूर्व विधायक शांतिलाल बिलवाल के नाम की चर्चाए है, लेकिन यहां भानू भूरिया का टिकट तय माना जा रहा है, क्योंकि भाजपा के कई बडे दिग्गज नेता भी भानु भूरिया के पक्ष में है, तो कांग्रेस की और से पूर्व सांसद कांतिलाल भूरिया व पूर्व विधायक जेवीयर मैड़ा दोनो में से एक को मेदान में उतारना तय है। हालाकि कांग्रेस की और से जेवीयर मैड़ा का नाम तय माना जा रहा है, क्योंकि अगर इन्हें टिकट नहीं दिया जाता है तो हो सकता है पूर्व विधानसभा चुनाव में की गई बगावत का सामना एक बार फिर कांग्रेस को करना पडे़े। इस उप चुनाव में दोनो हीं दल अपनी-अपनी उपलब्धि गिनाकर जनता को लुभाने का प्रयास करेंगे, लेकिन यहां दोनो पार्टियों के लिए राह आसान नहीं है। मैदान में उम्मीदवार जो भी हो लेकिन यहां कांटे की टक्कर रहेगी। कांग्रेस अपनी सरकार की उपलब्धिया गिनाकर जनता को अपने पक्ष में करने का प्रयास करेगी तो भाजपा कांग्रेस सरकार को विफल बताकर अपनी और आर्कषित करने का प्रयास करेगी।

एक-एक उम्मीदवार हो तो कांटे की टक्कर -
उप चुनाव में दोनो हीं पार्टी की और से किसी ने बगावत नहीं की और मैदान में एक-एक उम्मीदवार हीं रहा तो यहां दोनो हीं दलों में कांटे की टक्कर मानी जा रहीं है, लेकिन पूर्व में हुए विधानसभा के भांति इस उपचुनाव में भी बगावत कर कोई उम्मीदवार अपनी पार्टी के सामने उतारता है तो उनके लिए मुश्किले खड़ी हो सकती है। भाजपा की और से भी बगावत के सुर पूर्व विधानसभा चुनाव में देखने को मिले थे, लेकिन संगठन की समझाईश के बाद वह मान गयें थें। लेकिन यहां कांग्रेस को भारी नुकसान उठाना पड़ा था। हालांकि यह सीट भी कांग्रेस अपने कब्जें में कर सकती थी, लेकिन पूर्व सांसद कांतिलाल भूरिया के पुत्र मोह के कारण यह सीट भाजपा की झोली में चली थी और सांसद गुमानसिंह डामोर विधायक बने थे। इस बार भी अगर कांग्रेस में बगावत के सुर रहे थे तो शायद  एक बार फिर इस सीट से  हाथ धोना पड़ सकता है। हालांकि अभी टिकट किसे दिया जा रहा है, इसकी घोषणा नहीं हुई है। अब टिकट मिलने के बाद हीं स्थिती स्पष्ट होगी कि किस पार्टी में कौन किसके खिलाफ बगावत करता है और कौन नहीं..?
आपको बता दे की झाबुआ से विधायक रहें गुमानसिंह डामर के लोकसभा चुनाव में सासंद निर्वाचित जाने के बाद उनके विधायक पद से ईस्तीफा देने के बाद यहां उपचुनाव होने जा रहे है। 

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