आयुषी कुशल राठौड़, पेटलावद। हम बात कर रहें है आदिवासी बहुमूल्य क्षेत्र झाबुआ जिले की जो स्वास्थ्य से लेकर शिक्षा के क्षेत्र तक अभी भी काफ़ी पिछड़ा हुआ है। यहां अधिकतर मेहनत, मजदूरी कर अपना जीवन यापन करने वाले आदिवासी सहित अन्य वर्गों के लोग निवास करते है। क्षेत्र में उन्हें रोजगार नही मिलने से वह अन्य राज्यो में पलायन कर दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करने में दिन रात अपना पसीना बहाकर  परिवार का पालन पोषण करते है। लेकिन भृष्ट, चापलूसी में लिप्त शासकीय तानाशाह अधिकारी, कर्मचारी अपनी जेबे भरने में मस्त है। उन्हें इस बात का जरा भी भय नही होता कि उनके ऊपर भी अधिकारी है।  भ्रष्टाचार समाज में व्याप्त वास्तव में वो बुराई है, जिसके कारण समाज का ना केवल नैतिक पतन हो रहा है, बल्कि इससे समाज की आर्थिक स्थिति पर भी प्रहार हो रहा हैं।

भ्रष्टाचार में ना केवल बड़े-बड़े राजनीतिज्ञ शामिल होते हैं, बल्कि छोटे स्तर में भी कई लोग इसमें लिप्त होते है।
इनमें शिक्षा क्षेत्र, पुलिस, यहाँ तक कि हॉस्पिटल और स्वास्थ सम्बन्धित मामले भी शामिल होते है। जिले में भृष्ट तंत्र हावी है, ओर दिनरात गरीबो का शोषण करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे है।  हम यहां सब को गलत नही ठहरा रहे है, लेकिन कुछ अपनी वर्दी का रोब, पद का दुरुपयोग करते हुए गरीब आदिवासियों व ग़रीब पिछड़ी जाति को झांसे में लेकर उनको बर्बाद व अपने को आबाद करने की कोशिशों में लगे हुए है। यहां ईमानदारी को ताक में रखकर हजारों रुपये की मांग गरीब लोगों से करते आये है, लेकिन यह अच्छी बात है कि अब यहां के आदिवासी समाज व अन्य लोगों में जागरूकता आई है, ओर उन भृष्ट लोगो को सबक सिखाने में आगे आरहे है।
लेकिन आज भी कई लोग ऐसे भी है जो इनके डर के मारे अपनी आवाज नही उठा पाते है।

सारंगी चौकी प्रभारी उदाहरण के रूप में सामने -
अपनी खाकी का रोब व रुपयों की लालच में यहां चौकी प्रभारी ने एक पीड़ित गरीब आदिवासी व्यक्ति से 50 हजार रुपए की मांग कर डाली। एक गरीब परिवार से 50 हजार की मांग करते चौकी प्रभारी को जरा भी किसी का भय नही रहा। यहां तक पैसे नही देने पर उसे डराया धमकाया तक गया ओर जेल में भेजने की धमकी दी गई। मामला लड़का-लडक़ी के एक दूसरे के साथ भाग जाने सम्बंधित था इसलिए दोनों परिवारो ने भील जाती रिवाज अनुसार भील पंचायत में बैठकर मामले को आपस मे निपटा लिया था। चूंकि झाबुआ जिले में अधिकांश मामलों को भील पंचायत में आपसी भाई चारे के साथ बैठकर समाप्त कर लिया जाता है। यहाँ भी समझौता हो गया था लेकिन चौकी प्रभारी ने 50 हजार रुपये की मांग अपने लिए कर दी।  पूरे मामले में पीड़ित पक्ष ने चौकी प्रभारी से बिना डरे पुलिस अधीक्षक के समक्ष प्रस्तुत होकर पूरे घटनाक्रम की शिकायत दर्ज करवा दी, जिस पर पुलिस अधीक्षक ने बिना कोई देरी किये मामले को गम्भीरता से लिया और तत्काल सारंगी चौकी प्रभारी उनि प्रकाश सांठे को प्रभाव से निलंबित करने की कार्यवाही की गई। अब सवाल यह उठता है कि जिले में इस तरह खाकी का रोब दिखाकर जनता के रखवाले खुद उनका शोषण करे तो आमजन कहा जाए।  मामले में पीड़ित पक्ष पुलिस अधीक्षक के पास शिकायत करने पहुंच गए ओर पुलिस अधीक्षक ने बिना देरी किये कार्यवाही की जिससे आमजन में पुलिस के प्रति विश्वास भी जगा, किन्तु ऐसे चौकी प्रभारी के कारण पुलिस की बदनामी भी हो रही है। यहां अगर पीड़ित परिवार डर जाता तो चौकी प्रभारी 50 हजार डकारने में कामयाब हो जाते।
जनता के रक्षक बनकर उन्ही जनता का शोषण करने वाले ऐसे पुलिस वाले के कारण पूरा पुलिस महकमा बदनामी का दंश झेलता है। अगर इसी प्रकार ऐसे भृष्ट, चापलूसों पर कार्यवाही होती रहे तो पुलिस के प्रति जनता का विश्वास बरकरार रहेगा। साथ ही आमजन को भी चाहिए कि वह इस प्रकार से रिश्वत मांगने वाले से डरे नही ओर इसकी सूचना सम्बंधित उच्च अधिकारियों को दे ,  जिससे कि इनके खिलाफ कार्यवाही हो व इनके हौसले बुलंद न हो।

समय बदल गया है -
भृष्ट, चापलूस यह जान ले कि अब समय बदल गया है, लोग जागरूक हो गए है, पढ़ना लिखना सिख गए, आपसी भाई चारे के साथ रहने लगे है, अब यहां रिश्वत खोरो को सबक सिखाने की आमजन ने ठान रखी है। लेकिन फिर भी मेहनत, मजदूरी कर जीवन यापन करने वाले लोगो का शोषण करने वाले पर कब लगेगी लगाम... इसलिए अभी भी वक्त है....भृष्ट, चापलूसों को बदलना होगा.... एसपी साहब....।

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