आयुषी कुशल राठौड़, झाबुआ। झाबुआ विधानसभा चुनाव को लेकर आचार संहिता लग गई है, निर्वाचन आयोग द्वारा मतदान की तारीख घोषित कर दी गई है। राजनितिक गलियारों में हलचले तेज हो गई है। झाबुआ विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के गुमानसिंह डामोर ने कांग्रेस के दिग्गज कांतिलाल भूरिया के पुत्र डाॅ. विक्रांत भूरिया को हराकर चुनाव में भारी मतों से विजय प्राप्त की थी। यहां भाजपा ने गुमानसिंह डामोर को अपना चेहरा बनाया था। जिसका फायदा भी भाजपा को हुआ, विधानसभा झाबुआ की सीट भाजपा के कब्जें में आई, लेकिन अन्य दो सीटे पेटलावद व थांदला में कांग्रेस ने कब्जा किया था। सिर्फ एक सीट गुमानसिंह डामोर ने अपने कब्जें में करके भाजपा के अस्तीत्व को कायम रखा। लेकिन पूनः लोकसभा चुनाव में भाजपा ने गुमानसिंह डामोर पर भरोसा जताया और लोकसभा चुनाव में उम्मीदवार बनाकर कांग्रेस प्रत्याशी कांतिलाल भूरिया के सामने मेदान में उतारा था, यहां भी भाजपा के गुमानसिंह डामोर ने कांतिलाल भूरिया को करारी हार का सामना करवाया। लोकसभा चुनाव जितने के बाद गुमानसिंह डामोर विधायक से सांसद बन गयें और उन्होंने विधायक से इस्तीफा दे दिया। जिस कारण यह सीट रिक्त हो गई थी। अब पूनः इस सीट पर उपचुनाव को लेकर चुनाव आयोग ने तारीख की घोषणा कर दी है जिससे एक बार पुनः राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।

कांग्रेस में बगावत, बन सकता है हार का कारण -
पूर्व में विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस की और कांतिलाल भूरिया के पुत्र विक्रांत भूरिया मैदान में थे तो भाजपा की और से गुमानसिंह डामोर मेदान में थे। यहां कांतिलाल भूरिया ने अपने पुत्र विक्रांत को टिकीट दिलाकर मेदान में उतारा था, जिसका कांग्रेस के अन्य वरिष्ट नेताओं ने पुर जोर विरोध किया था, साथ हीं पूर्व विधायक जेवीयर मैड़ा ने कांग्रेस से बगावत करते हुए निर्दलिय चुनाव लड़ा। जिस कारण कांग्रेस में दो गुट हो गयें। यहां कांग्रेस में दो गुट होने से भाजपा को पुरा फायदा हुआ और इस सीट पर भाजपा ने अपना कब्जा जमा लिया। अगर यहां जेवीयर मेड़ा कांग्रेस से बगावत कर चुनाव नहीं लड़ते तो यह सीट भी कांग्रेस की झोली में आने की पुरी-पुरी संभावना थी। लेकिन यहां कांग्रेस की गुटबाजी हीं कांग्रेस को ले डुबी।

अभी भी जारी है बगावत -
इस सीट को लेकर चुनाव आयोग ने मतदान की तारीख की घोषणा कर दी है, अब टिकीट को लेकर कांग्रेस में फिर से गुटबाजी नजर आने लगी है। एक और कांग्रेस कार्यकर्ता कांतिलाल भूरिया को टीकट देने की मांग कर रहे तो दुसरी और जेवीयर मैड़ा के समर्थक टिकट के लिए अडे हुए है। अब कांग्रेस पार्टी भी मुश्किल में है कि आखिर दोनो मे से किसें टिकट दिया जाए। यहां कांग्रेस पार्टी को अपनी गुटबाजी पर लगाम लगाने की जरूरत है। अगर इस बार इसी तरह विरोध के स्वर पार्टी में रहे तो पूनः यह सीट भाजपा की झोली में जा सकती है।

भाजपा की और से भी चेहरे का इंतजार -
चुनाव आयोग ने चुनाव तारीख का एलान कर दिया है। अब कांग्रेस के साथ ही भाजपा से भी उस चेहरे का इंतजार है जिसे भाजपा अपना उम्मीदवार बनाएंगी। सूत्रों की माने तो भले ही भाजपा एकजुट है लेकिन प्रत्याशी की घोषणा होने के बाद भाजपा में भी कही ना कही से बगावत के स्वर उठ सकते है। झाबुआ विधानसभा सहित पुरे जिले के नेताओ और जनता की निगाहे दोनों पार्टी के प्रत्याशियों की घोषणा पर टिकी है। 

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