बामनिया। जैन श्वेतांबर स्थानकवासी व तेरापंथ समाज में पर्वाधिराज पर्युषण के अंतिम दो दिन शेष है। वही मंदिर मार्गी समाज द्वारा कल संवत्सरी पर्व मनाया जाएगा। धर्मदास स्वाध्याय संघ थांदला की ओर से स्वाध्यायी बहन स्नेहलता मोदी व अनुपमा श्रीमार थांदला से धर्म-आराधना के लिए बामनिया आए हुए है। स्वाध्यायी बहनों द्वारा प्रतिदिन कल्पसूत्र के वाचन के साथ ही धर्म की जीवन में महती भूमिका के बारे में विस्तार से बता रही है।

स्वाध्याय बहन स्नेहलता मोदी ने कहा कि कोई आत्मा ज्ञानी होती है या सम्यक बनती है उसकी पहचान तब ही होती है  जब आत्मा हमेशा अच्छे विचार करे पाप राग द्वेष आदि करने में संकोच करे। भगवान की वाणी का श्रवण करे। ऐसे हमारी आत्मा में प्रस्सत सुविचार आते हैं ऐसे जीव ज्ञान भाव रूप में परिणत बनता है।

स्वाध्याय बहन अनुपमा श्रीमार ने धर्मसभा में कहा कि हमारी आत्मा के अंदर ज्ञान परिणत हो गया तो जीव हिंसा झूठ चोरी आदि इस लोक परलोक के सुख-दुख को समझता है । जीवन जीने की कला जीवन अपना कांच के समान है एक बार टूट जाए तो वह वापस नहीं जुड़ सकता है. मेडिकल पर गोली लेने जाते हैं तो हम कब बनी है और उसके अंतिम तारीख कब है यह जरूर देखते हैं। मगर हमने कभी यह सोचा है कि हमें हमारा जीवन कब की जन्म की तारिक़ याद रहती है मगर मृत्यु कब होगी ये हमे पता है इसलिए ज्ञानी जन कहते हैं. कि अपना समय अधिक से अधिक धर्म आराधना में लगाए जप तप  त्याग करें क्योंकि धर्म करने का कोई समय नहीं होता है .यह संसार असार है धर्म आराधना करनी चाहिए। मंदिर मार्गीय सम्प्रदाय में कल संवत्सरी महापर्व कल मनाया जाएगा।

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