राजगढ़। इस वर्ष रक्षा बंधन पर्व भद्रा मुक्त है। इसलिए बहने अपने भाई की कलाई पर कभी भी राखी बांध सकती है। 18 वर्ष बाद स्वतंत्रता दिवस और रक्षा बंधन एक ही दिन आया है। इससे पहले सन् 2000 में 15 अगस्त मंगलवार और रक्षा बंधन पर्व एक ही दिन आया था। उक्त जानकारी देते हुए नगर के पांच धाम एक मुकाम श्री माताजी मंदिर के ज्योतिषाचार्य श्री पुरूषोत्तमजी भारद्वाज ने बताया की रक्षा बंधन पर्व आदी अनादी काल से मनाया जाता रहा है। रक्षा बंधन के दिन श्रावणी पर्व भी है। इस दिन प्रातः 7ः30 बजे से मंदिर पर श्रावणी पर्व मनाया जाकर यज्ञोपवित किया जाएगा। जिसमें अनेक जनेउधारी पुरूष शामिल होंगे। यह रक्षा बंधन भद्रा मुक्त हैं। इसलिए कभी भी राखी बांध सकते हैं। लेकिन इस दिन कुछ खास महूर्त हैं। जिसमे ही आपको राखी बांधनी चाहिए। इस दिन पूर्णिमा तिथि सायंकाल 05ः59 तक है। रक्षासूत्र (राखी) बाँधने हेतु शुभ का  चौघड़िया प्रातः 06ः02 से प्रातः 07ः39 तक, चर-लाभ-अमृत का चौघड़िया प्रातः 10ः54 से दोपहर 03ः46 तक रहेगा। शुभ का  चौघड़िया  सायं 05ः23 से सायं 07ः00 तक रहेगा। श्रेष्ठ मुहूर्त - अभिजित मध्याह्न 12ः07 से 12ः55 तक है। इन महूर्त में राखी बांधना श्रेष्ठ रहेगा।

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