राजगढ़। पत्रकारों की मांग पर आज सुबह वन विभाग द्वारा पत्रकारों को खरमोर अभ्यारण क्षेत्र पानपुरा का दौरा करवाया गया। इस दौरान विभाग द्वारा जो पक्षी खरमोर के नाम से बताया गया है उसे ग्रामीणों ने नकार दिया। मामले की जानकारी मिलते ही विधायक प्रताप ग्रेवाल भी मौके पर पहुंचे तथा वन विभाग के अधिकारियो से चर्चा की गई।
दरअसल आज प्रातः 8 बजे पत्रकारों की एक टीम को साथ वन विभाग के एसडीओ राकेश डामोर द्वारा ग्राम टीमायची के समीप पानपुरा के खरामोर अभ्यारण ले जाया गया। जहां पर एसडीओ डामोर द्वारा मीडियाकर्मियों  को दूरबीन के माध्यम से खरमोर पक्षी दिखाया गया। इस दौरान ग्रामीणों को जैसे ही इस बात की जानकारी मिली वे भी मौके पर पहुंच गए। जिस पक्षी को विभाग द्वारा खरमोर बताया जा रहा था वह साफ एवं स्पष्ट नजर नही आने पर वन विभाग की टीम वहां से आगे बड़ते हुए सरदारपुर तहसील के अंतिम छोर एवं धार- झाबुआ जिले की सीमा पर मौजुद पानपुरा खरमोर अभ्यारण के कक्ष क्रमांक 422 पर मीडियाकर्मियों को ले जाया गया। जहां पर सैकड़ो मीटर दुर से दूरबीन के माध्यम से विभाग द्वारा एक पक्षी दिखाया गया। जिसे विभाग के अधिकारी राकेश डामोर ने खरमोर बताया। इस दौरान ग्रामीणों ने कहा की हम नही मानते की यह खरमोर पक्षी है। विभाग के एसडीओं डामारे द्वारा पक्षी के फोटो भी खिंचे गए।
2 से 3 खरमोर पक्षी देखे गए है - वन विभाग के एसडीओ राकेश डामोर ने बताया की कक्ष क्रमांक 422 झाबुआ वन मंडल सीमा से लगा हुआ भेरूपाड़ा (भूरीघाटी) अभ्यारण क्षेत्र में 2 से 3 पक्षी दूरबीन के द्वारा पत्रकारों को दिखाए गए है। उसके फोटों भी हमारे द्वारा लिए गए है। जिसकी पुष्टि मेने खरमोर के रूप में की है। बर्ड ऑफ इंडिया बुक के माध्यम से भी इसकी पुष्टी की गई। सरदारपुर तहसील के भेरूपाड़ा गांव में भी पिछले साल खरमोर देखने की सुचना मिली थी। खरमोर पक्षी है, जिसका 1982-83 में जो नोटीफीकेशन हुआ था सरकार के द्वारा उस समय यह पक्षी जो 14 गांवों में इस मौसम में दिखाई देता था। क्योंकी यह मौसम उनके लिए प्रजनन का है और वो इसी लिए यहां आता है। लेकिन 25 से 30 वर्षो में हमारा एग्रीकल्चर पेटर्न चेंज हुआ है। खरमोर पक्षी जो कीड़े-मकोड़े खाता है वह एग्रीकल्चर एरीया खत्म हो चुका है। खेतों में दवाई के छिड़काव से कीड़े-मकोडे़ खत्म हो जाते है। लेकिन अभ्यारण क्षेत्र में हम लोगो ने कीटनाशक दवाई मुक्त रखा है। यहा हम जो मुंग और उड़द उगा रहें है वहा किसी प्रकार की किटनाशक का उपयोग नही कर रहें है। इसलिए इनमें जो कीड़े लग रहें है और दुसरे भी जो कीड़े है घास में, उनका यह पक्षी आहार बनाता है इसलिए सामान्य तौर पर यह यहां पर दिखाई देता है।
ग्रामीण बोले नही है खरमोर - वन विभाग द्वारा पक्षी के फोटो खिचकर भी मिडयाकर्मीयों को दिखाए गए। इस दौरान ग्रामीणों ने कहा की यह खरमोर पक्षी नही है। ग्राम टीमायची के उप सरंपच छगन बारिया ने बताया की हर बार यहां पर सिर्फ वन विभाग को ही खरमोर पक्षी दिखता है। यह जो पक्षी दिखा रहें है हम नही मानते की वह खरमोर पक्षी है। वहीं पत्रकारो से भ्रमण के दौरान कई ग्रामीण एक ही बात कहते नजर आए की खरमोर पक्षी अगर है तो वह हमको तो दिखता ही नही है।
विधायक ग्रेवाल भी पहुंचे - विधायक प्रताप ग्रेवाल के समक्ष पत्रकारों द्वारा यह मांग रखी गई थी की अगर खरमोर पक्षी आए है तो वन विभाग द्वारा पत्रकारों को भी दिखाए जाए। जिसके बाद विधायक ने वन विभाग के एसडीओ को निर्देश दिए। मीडियाकर्मियों के पहुंचने के बाद विधायक प्रताप ग्रेवाल भी मौके पर पहुंचे। इस दौरान विधायक ग्रेवाल को विभाग द्वारा झाबुआ वन मंडल की सीमा से लगे हुए खरमोर अभ्यारण में दुरबीन के माध्यम से पक्षी दिखाए गए। इस दौरान विधायक ग्रेवाल ने विभाग के एसडीओ से कहा की अगर खरमोर पक्षी यहां विचरण करता है तो केवल इसके आसपास के ही क्षेत्र के गांवो पर प्रतिबंध लगाया जाए। बाकी गांवों से जमीनी खरीदी बिक्री सहीत लगी हुई अन्य रोक हटाई जाए। जिस पर विभाग के एसडीओ द्वारा उन्हें इस संबंध में जानकारी प्रदान की गए। जिस पर विधायक द्वारा तत्काल धार कलेक्टर से समय लिया गया। विधायक ग्रेवाल ने बताया की इस संबंध में जिन गांवो पर रोक लगी हुई है वहा के ग्रामीणों तथा एसडीएम व वन विभाग के अधिकारीयों के साथ मंगलवार को कलेक्टर से चर्चा की जाएगी। अगर खरमोर पक्षी यहां है तो केवल यही के आसपास क्षेत्र के गांवो पर प्रतिबंध लगे बाकि गांवों को इससे मुक्त किया जाना चाहीए।
खरमोर का दंश भुगत रहें 14 ग्राम के ग्रामीण - आज वन विभाग द्वारा जो पक्षी बताया गया उसे विभाग  खरमोर पक्षी कह रहा है तो इधर ग्रामीण उसे नकार रहें है। वन विभाग के एसडीओ ने खरमोर की पहचान सम्बंधित कुछ तथ्य भी बताए। दरअसल खरमोर पक्षी के कारण सरदारपुर तहसील के गांव गुमानपुरा, बिमरोड, छड़ावद, पिपरनी, सेमलिया, केरिया, करनावद, सियावद, धुलेट, अमोदिया, सोनगढ़, महापुरा, टिमायची तथा भानगढ़  पर भूमी खरीदी-ब्रीकी तथा अन्य तरह की रोक लगी हुई है। कुछ गांव ऐसे भी है जहां पर कभी खरमोर पक्षी देखा ही नही गया है फिर भी उन गांवों पर खरमोर के नाम पर रोक लगाई है। आज खरमोर के रूप में जिन पक्षी को वन विभाग द्वारा बताया गया वह झाबुआ जिले की वन मंडल की सीमा में देखा गया। अगर वाकई खरमोर पक्षी वहा है तो सरदारपुर तहसील के अनेक गांव जहां कभी खरमोर दिखा ही नही है वहा से प्रतिबंध हटाया जाना चाहीए।

खरमोर के नाम पर है कई भ्रांतीया - क्षेत्र में खरमोर पक्षी के नाम से अलग-अलग बाते प्रचलित है। कोई इसे आस्ट्रेलिया का पक्षी बताता है तो कोई किसी और देश का। बताया जाता है की खरमोर पक्षी कि भी कई प्रजातियां है। लोगो में खरमोर को लेकर कई प्रकार की नकारात्मक मानसीकता भी है। जिसे वन विभाग द्वारा दुर किया जाना चाहिए। क्योंकी लोग तो यही मानते है कि क्षेत्र में खरमोर पक्षी दिखेगा तो गांव में कई तरह के प्रतिबंध लग जाएंगे।

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