राजगढ़। पर्वाधिराज पर्व पर्युषण महापर्व की शुरूआत सोमवार से हुई। आठ दिन तक चलने वाले इस महापर्व में अनेक धार्मिक आयोजन होंगे। श्री मोहनखेड़ा महातीर्थ पर प्रातः से ही श्रद्धालुओं की भीड़ मंदिरों में नजर आई। तीर्थ पर चातुर्मास हेतु विराजित आचार्यदेवेष श्री ऋषभचंद्रसूरीष्वरजी के आज्ञानुवर्ती मुनिराज श्री रजतचंद्र विजयजी एवं वैराग्ययष विजयजी मसा एवं साध्वी मंडल की पावनतम निश्रा में चातुर्मास चल रहा हैं। चातुर्मास समिति के मीडिया प्रभारी दीपक जैन ने बताया कि पर्व के पहले दिन मुनिराजश्री ने उपस्थित धर्मावलंबियों को संबोधित करते हुए कहा कि परमात्मा की वाणी ही जीवन का उद्धार कर सकती है और हमें इस भव सागर से पार कर सकती है। पयुर्षण का यह पर्व अंतर्मन की सफाई का महापर्व है। इस पर्व में मनुष्य कर्मो की सफाई करके तार सकता हैं। मुनिश्री ने पर्व की महिमा बताते हुए कहा कि यह पर्व सबसे बड़ा पर्व हैं और इस पर्व में हमें हिंसा, चोरी आदि अनावष्यक हरकतें नहीं करना चाहिए। परमात्मा की पूजा के महत्व पर प्रकाष डालते हुए मुनिराजश्री ने कहा कि पूजा हमेषा भाव से होना चाहिए। भाव से जब पूजा होती है तो परमात्मा हमारे निकट होते है। गुरू की महिमा पर भी प्रकाष डालते हुए मुनिराज श्री ने बताया कि गुरु ही अंधकार से प्रकाष की ओर ले जाते हैं और वे ही हमें सच्चा मार्ग दिखाते हुए प्रभु मार्ग की ओर बढ़ाते है। सुबह की गहुली के लाभार्थी टी.सी. सुराथ भवानीमंडी वहीं दोपहर की गहुली के लाभार्थी मनोहरलाल फाकरिया नलखेड़ा रहे। तीर्थ पर सामुहिक अठ्ठाई का आयोजन भी किया जा रहा हैं। दोपहर में प्रवचन के बाद प्रष्न मंच का आयोजन किया गया। इसमें समाज के बच्चों सहित बढ़ो ने भी भाग लिया और धर्म से संबंधित सवालों के जवाब देकर पुरस्कार प्राप्त किए। चातुर्मास समिति के कार्यकर्ता पर्वाधिराज पयुर्षण की व्यवस्था में सक्रियता से कार्य कर रहे हैं।

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