आयुषी राठौड़,पेटलावद। एक तरफ सरकार की स्थानांतरण नीति से वर्षों से वनवास भोग रहे शिक्षकों में खुशी व्याप्त है तो वही दुसरी और विद्यार्थियों के लिए उनके भविष्य को चोपट करने जैसा कदम है। इस स्थानांतरण से पेटलावद क्षेत्र के कई स्कूलों में ताले लगने जैसी स्थिति निर्मित हो गई तो कई स्कूल पूर्णतया अतिथि शिक्षकों के भरोसे हो गए हैं। जिससे बच्चें शिक्षा से वंचित हो रहे है, झाबुआ जिले मे तो जिले से जिले में स्थानांतरण के कारण पेटलावद क्षेत्र की स्कूलों की स्थिति तो इतनी  भयावह हो गई है की स्कूलों में ताले लग गए। जिससे बच्चों को भी खासा परेशान होना पड़ रहा है। जिले से आई सूची में पेटलावद से पेटलावद में ही शिक्षकों के स्थानांतरण मात्र 8 से 10 किलोमीटर के एरिया में कर के स्थानीय अधिकारी क्या सिद्ध करना चाहते हैं ? यह समझ से परे है।  लेकिन इस बात से यह अंदेशा लगाया जा सकता है की इसमें भी गुलाबी कागज व गाँधी छाप कागजो ने कमाल दिखाया है। अधिकतर उन सेटिंग बाज शिक्षकों ने अपना स्थानांतरण इतनी कम दूरी पर कराया है जो या तो स्कूलों से जी चुराते हैं या ग्रामीण स्कूलों में कार्य नहीं करना चाहते है। यह सारा खेल सत्ता और शासन में बैठे लोगो की मिलीभगत से छात्रों के भविष्य को अंधकार बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे  है। अभी भी कई दलाल सक्रिय होकर शिक्षको से संपर्क करते घूम रहे हैं की जिनका स्थानांतरण नहीं हुआ है उनका अभी भी स्थानांतरण करवा सकते हैं। एक तरफ शासन चाहता है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार हो और दूसरी तरफ खुद शासन सवालों के कटघरे में खड़ा हो जाता दिखता है। खुद शासन ही व्यवस्था बिगाड़ रहा है। साथ ही स्थानांतरण से खाली हुए स्कूलों  मे पदों को भरने के लिए ली गई परीक्षा का परिणाम कई महीने बीत जाने के बाद भी घोषित नहीं किया जा रहा है, जबकि नियम है की किसी भी परीक्षा के आयोजन के 45 दिन पश्चात रिजल्ट घोषित किया जाए। जब रिजल्ट ही घोषित नहीं हुआ तो फिर नियमित शिक्षकों की भर्ती कब होगी यह भी एक बड़ा सवाल है। बेरोजगार अभी भी उस रिजल्ट का इंतजार कर अपनी नियुक्ति के लिए बाट जो रहे हैं पर सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है। वही स्थानीय स्तर पर योग्य अतिथि शिक्षकों के अभाव में बिना योग्य या अयोग्य करीबी लोगों को ऑफलाइन नियुक्ति भी दी जा रही है । अल्प वेतन पर कार्य कर रहे इन अतिथि शिक्षकों से इस कार्य की इमानदारी से कितनी उम्मीद की जा सकती है जबकि इनमें कई अतिथि शिक्षक प्रशिक्षित भी नहीं है। वही कुछ पेटलावद के स्थानीय नेता  अपनी धाक जमाने के लिए व अपनी व्यक्तिगत द्वेष भावना से प्रेरित होकर योग्य शिक्षकों का भी झूठी शिकायत कर स्थानांतरण करवाने में भी कोई कसर नही छोड़ रहे है। जबकि वह शिक्षक ईमानदारी से कार्य कर रहे है। शासन को चाहिए की पूरी तरीके से निष्पक्ष रुप से जांच करके ही स्कूलों से शिक्षकों का स्थानांतरण किया जाए व योग्य व अनुभवी शिक्षकों की शीघ्र नियुक्त की जाए। आखिर एक साथ एक ही स्कूल के पूरे के पूरे स्टाफ का स्थानांतरण होना स्थानीय अधिकारी की संलिप्तता भी दर्शाता है कि उन्होंने पोर्टल पर सही जानकारी नहीं लोड की जिसका फायदा दलाल उठा रहे हैं।

अधिकारी और नेताओं की मिलीभगत से थोकबंद तबादले-  
स्थानांतरण नीति में संकुल प्राचार्य की दुकानदारी चल पड़ी है उनकी चांदी हो गई है विश्वस्त सूत्रों से जानकारी पता चली है कि कार्यमुक्त करने के नाम पर प्राचार्य 5 हजार से 10000 तक वसूली कर रहे हैं और अपनी जेबें गर्म कर रहे हैं।  इससे सिद्ध होता है कि पूरा सिस्टम ही भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है। मध्य प्रदेश शासन के द्वारा बच्चों की पढ़ाई का विशेष ध्यान देने के लिए शासन के द्वारा दक्षता उन्नयन के तहत बच्चों के तहत  बच्चों को ज्ञान की गुणवत्ता की ओर ध्यान दिया जा रहा है और सभी शिक्षकों को निर्देशित किया गया है कि इस ओर विशेष ध्यान दें लेकिन पेटलावद विकासखंड मैं अधिकारी एवं नेताओं की मिलीभगत से कई शिक्षकों के तबादले हो रहे हैं जिस कारण क्षेत्र की स्कूले अतिथि शिक्षकों के भरोसे हैं । ऐसा ही मामला ग्राम उन्नई में भी देखने को मिला यहां पर 2 शिक्षकों का तबादला शासन ने कर दिया और तीन अतिथि के भरोसे स्कूल चल रही है। साथ ही प्राथमिक विद्यालय के प्राचार्य के पास माध्यमिक व प्राथमिक दोनों स्कूलों का चार्ज है। समय रहते संकुल प्रभारी एवं अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया तो निश्चित ही यह आदिवासी बाहुल्य जिला निरक्षता की ओर बढ़ता है दिखाई दे रहा है । प्रदेश में हुए थोकबंद तबादलों का असर अब दिखने लगा है। आदिवासी झाबुआ जिले में भी कई शिक्षकों के तबादले हुए। इन तबादलों के चलते ग्रामीण इलाकों में शिक्षा व्यवस्था चरमरा गई है।  ताजा मामला पेटलावद ब्लाक के मोहकमपुरा ग्राम स्थित माध्यमिक शाला का है। जहां 105 बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी 2 अतिथि शिक्षकों पर है। दरअसल, मोहकमपुरा माध्यमिक शाला मे पदस्थ 3 नियमित शिक्षकों का तबादला कर दिया गया। जिसके बाद शाला में पदस्थ एक अतिथि शिक्षक.. एक ही कमरे में 5 वी से आठवी तक के बच्चों को बैठाकर पढ़ाने को मजबुर था। हाल ही में शिक्षकों की कमी की खानापुर्ति के लिये जिम्मेदारों ने एक अतिथि शिक्षक नियुक्त कर दिया गया, लेकिन सवाल यह उठता है कि माध्यमिक शाला से विषय विशेषज्ञ शिक्षकों का तबादला कर अतिथि शिक्षकों के भरोसे कैसे मध्यप्रदेश के होनहारों को गुणवत्तापूर्ण ज्ञान मिलेगा। शिक्षकों की कमी को लेकर जिम्मेदार कैमरे पर कुछ भी बोलने को तैयार नही है।
इस मामले में सहायक आयुक्त प्रशांत आर्य का कहना है कि एक साथ तीनों शिक्षको को रिलीव नहीं करना चाहिए, यह गलत है। इस मामले को में दिखवाता हु और उचित कार्यवाहीं की जावेगी।

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