अक्षय चौहान, खवासा। 16 वर्षीय बालक मयंक पिता महेंद्र वागरेचा आज से 3 दिन पूर्व प्रतिदिन की तरह गुरुवार को घूमने निकला था,काफी समय के बाद भी युवक के नही आने पर परिजन द्वारा आस पास पूछताछ के दौरान भी युवक के नही मिलने पर देर रात खवासा चौकी पर गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई थी,परन्तु आज शाम धोबी धंटे स्थित कार्य कर रहे मजदूर ने शव होने की सूचना परिजन को दी तब जाकर पुलिश और परिवार द्वारा मयंक के रूप में शिनाख्त करी,पुलिश द्वारा मोके पर पंचनामा बनाकर पोस्टमार्टम के लिए थांदला भेजा गया। प्रतिदिन की तरह मयंक गुरुवार सुबह भी घूमने के लिए थांदला रोड पर गया था काफी समय निकल जाने के बाद में घर वालो ने आस पास पूछताछ करने के बाद भी नही मिलने पर खवासा चौकी पर गुरुवार देर रात रिपोर्ट दर्ज करवाई,वही पुलिश द्वारा भी अपने वरिष्ठ अधिकारीयो को बालक के गुम होने की सूचना फ़ोटो व नाम,पता नम्बर सहित दी गयी,परन्तु पुलिश की आसपास के क्षेत्रों की सही से तलाशी नही ली गयी अपितु सिर्फ आश्वाशन के नाम पर सर्चिंग जारी है का हवाला दिया गया वही उक्त मुहावरा बगल में छोरा और गांव में ढिंढोरा ये मुहावरा खवासा चौकी पर लागू होता है।

डॉक्टर के नही होने से पोस्टमार्टम के लिए भेजा जाता थांदला -
क्षेत्र में 20 पँचायत से 45 से 50 गांव आते है जिनकी कुल आबादी 60 से 65 हजार के बीच मे है ऐसे में खवासा में एक मात्र प्रथमिक स्वास्थ्य केंद्र ड्रेसर ओर नर्स के भरोसे है? ऐसे में बीते दो पखवाड़े में लगभग 2 बालिका ओर 2 नवयुवक का पोस्टमार्टम खवासा डॉक्टर की अनुपस्थिति में खवासा से पोस्टमार्टम के लिए 20 किलोमीटर दूर थांदला भेजा जाता है और वही पिछली बार भी एक युवती को जानवर के काटने के चलते युवती को पोस्टमार्टम के लिए थांदला भेजा जाता है परंतु थांदला के डॉक्टर द्वारा भी मानवीयता को भूल कर पेटलावद पोस्टमार्टम के लिए भेजा जाता है वही मामले को लेकर उक्त बात बात सीएचएमओ,बीएमओ को लिखित आवेदन भी दिया गया और मौखिक भी बोला गया परन्तु स्वास्थ्य विभाग तस से मस नही हो रहा ऐसे में ग्रामीणजन का स्वास्थ्य विभाग के प्रति गहरा रोष आने वाले दिनों में देखा जा सकता है।

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