विनोद सिर्वी, धुलेट। 5 अगस्त से चारभुजा नाथ मंदिर प्रांगण में प्रजापति समाज द्वारा आयोजित साप्ताहिक संगीतमय भागवत कथा के छठे दिन भगवान श्री कृष्ण व रुक्मणी के मंगल विवाह के प्रसँग पर भक्त गण खूब नाचे और नूतन वस्त्र धारण कर विवाह के मंगल गीत गाये। चारभुजा नाथ मंदिर धुलेट के कोषाध्यक्ष रामलाल प्रजापति ने बताया क़ि 5 अगस्त से 11 अगस्त तक चलने वाली संगीतमय भागवत कथा के छठे दिन पं. सुभाषजी शर्मा (दत्तीगांव) ने भगवान श्री कृष्ण व रुक्मणी के मंगल विवाह का सुन्दर वर्णन सुनाकर पुरे पाण्डाल को विवाह स्थल बना दिया ।
इससे पूर्व पं. शर्मा ने कहा क़ि हमारा जीवन ही एक कथा है । कथा से ही जीवन बनता है। और हम सुखप्रद जीवन जीते है । ईश्वर ने हमें मानव जन्म दिया है। तो हमारा कर्तव्य बनता है। कि हम ज्ञान भक्ति सत्संग करके जीवन को सफल बनाये। भक्ति दिखावे की ना करे अपितु भाव की करे।सच्चे मन से भक्ति का ईश्वर भी सम्मान करता है।श्री कृष्ण की मनमोहक तान वाली मुरली का अनेक दृटान्तों से वर्णन कर भक्तो को मोहित कर दिया ।कृष्ण के विरह में व्याकुल गोपियो की दशा का ऐसा कारुणिक वर्णन किया गया कि  श्रोताओ की आँखों से अश्रुधारा बहने लगी।भावुक होकर कृष्ण गोपी के अनन्य प्रेम की गाथा को सुना गया।गोपियो ने निष्काम भाव से श्री कृष्ण के नाम का रसास्वादन किया। इसलिए वे गोपी के नाम से विभूषित हुई ।इस अवसर पर श्री कृष्ण राधा की रास लीला पर भक्त गणो ने रास लीला का नृत्य किया।बालिकाओं ने राधा कृष्ण बनकर प्रस्तुति दी।
कृष्ण के मथुरा जाने के बाद उद्धव का ब्रज में निर्गुण ज्ञान का सन्देश का प्रसंग भी सुनाया गया। भगवान श्री कृष्ण और रुक्मणी के मंगल विवाह पर भक्त गण बधाई गीत गाते हुए  "आज मेरे श्याम की शादी है...... आदि भजनों पर श्रोता खुब नाचे। ॐ गुरु मित्र मंडल द्वारा शानदार भजनों प्रस्तुतियां दी गई। कृष्ण रुक्मणी विवाह के पश्चात सिचावनी हुई तत्पश्चात महाआरती के बाद महाप्रशादी वितरित की गई। बड़ी संख्या में भक्तजन कथा श्रवण करने पहुंचे। भागवत कथा का समापन रविवार को होगा।

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