नरेंद्र पँवार, दसाई। श्रावण के तीसरे सोमवार को नगर मे अतिप्राचीन रामरामेश्वर मन्दिर से भव्य शाही सवारी श्रीरामरामेश्वर वृक्षारोपण विकास समिति एवं रामायण मण्डल के तत्वावधान मे नगर के प्रमुख मार्गो से निकाली गई । कार्यक्रम ऐसा लग रहा था मानो कोई उज्जैन की शाही सवारी का आयोजन हो रहा हो।
प्रातः रामरामेश्वर मन्दिर मे भगवान भोलेनाथ का महाभिषेक विद्वान पण्डितो द्वारा किया गय। अभिषेक के समापन के साथ मन्दिर से शाही सवारी का श्रीगणेश किया गया। सवारी मे आगे भक्तजन हाथ मे ध्वजा लेकर चल रहे थे जिसकी संख्या काफी मात्रा मे थी। हर कोई ध्वजा के साथ बोलबम  के नारे लगाकर चल रहा था। घोडे पर बच्चे भी शाही सवारी की रौनक बढा रहे थे। वहीं साथ चल रही भूतो की टोली ने शाही सवारी मे चार चांद लगा दिये। वहीं शिव तांडव नृत्य ने हर किसी का मनमोह लिया। बैंड बाजे, डीजे, ताषे एवं ढोल पर युवाओ के साथ-साथ हर किसी ने नृत्य कर कार्यक्रम मे समा बांध दिया। हाथी पर शिवलिंग की शाही सवारी आकर्षण का केन्द बिन्दु रही ।
शाही सवारी का नगर के कई मंचो द्वारा स्वागत किया गया। जिसके चलते गुलाब की पत्तियोे से सडक पट गई थी। वही जहाॅ-जहाॅ से भोले गुजरे लोगो ने अपने घरो से निलकर भोले की पूजा-अर्चना की । स्कूली बच्चो ने भी अपना सहयोग देकर कार्यक्रम को काफी संवारा। शाही सवारी इतनी लम्बी थी की प्रारम्भ से लगाकर समापन तक पता ही नही चला। षाही सवारी के स्वागत में महिलाओं ने अपने घर आंगन में रंगोली बनाकर भगवान भोले का स्वागत किया। जो तारिफे काबिल थी।
शाही सवारी का स्वागत मंचो ने फल, साबूदाने की खिचडी और कई फरियाली सामान का वितरण भी किया।
शाही सवारी को देखने के लिये दसाई सहित आसपास के हजारो भक्तो की उपस्थिति थी। जिसके कारण बाजार मे पैर रखने की जगह तक नही मिली। सुबह से शाम तक नगर मे धार्मिक माहौल बना रहा। समापन-शाही सवारी का समापन रामरामेश्वर मन्दिर मे किया गया जहाॅ महाआरती के साथ-साथ महाप्रसदी का वितरण किया गया।
कार्यक्रम में यह रहा विशेष-
शाही सवारी के प्रारम्भ होने के पहले ही भक्तो का देखने के लिये आने का क्रम जारी हो  गया था देखते-देखते ही नगर मे मेले जैसा माहौल बन गया। वही भोलेनाथ का विषेष श्रंगार किया गया था जिसे देखने के लिये मन्दिर मे काफी भीड रही हर कोई अपनी बारी का इंतजार कर रहा था। हर भक्त के मस्तिष्क पर चंदन के साथ-साथ शिवलिंग की आकृति बनी हुई थी। भोले के स्वागत के लिये फुलों की तोप चल रही थी जिसके कारण फुलों की बारिश हो रही थी तो इन्द्रदेव ने भी फुवारो के माध्यम से भगवान का अभिषेक किया। शाही सवारी के दौरान नगर के समस्त विद्यालयों मे अवकाष जैसी स्थिति निर्मित हो गई। तथा सवारी के समय लगभग सभी घर सुनसान होकर घरों में कोई भी नहीं था।

Post a Comment

  1. Ki sir ji google se ads dalva lo peise milege

    Mst he sir ji


    Ye website html se banai he na

    Mujhe bhi thodi bahut html aati he or next month se me..

    Web development ki coaching chalu karuga


    Mst he sir ji aapki post

    ReplyDelete

 
Top