नरेंद्र पँवार, दसाई। जिला मुख्यालय से 40 किमी दूर स्थित गांव दसाई विभिन्न समस्याओं से रूबरू तो है ही वहीं सत्र 2007-08 में स्थानीय शासकिय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में भोज मुक्त परीक्षा केन्द्र प्रारंभ होने से कई निर्धन गरीब आदिवासी छात्रों को स्कूली शिक्षा के बाद विगत 12 वर्षो से स्नातक स्तर की पढाई के लिये यह अवसर मिल रहा था। लेकिन इसी सत्र 2019-20 से भोज मुक्त परीक्षा केन्द्र बंद कर दिये जाने से छात्रों में घोर निराशा छा गई है। अब वे निर्धन आदिवासी छात्र-छात्रायें जो सुदुरवर्ती गांव मे रहते है तथा जिनकी पहुंच शहरी पढाई तक नहीं है वे अब ग्रामीण क्षेत्र में मिल रहीं दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से उच्चतर शिक्षा से भी वंचित हो जावेंगें।

क्या है यह योजना- इस योजना मे मुख्य रूप से सुदुर ग्रामीण अंचलों में महाविद्यालयीन शिक्षा सें विंचंत निर्धन छात्र एवं विशेषकर महिला छात्रायें जो अपनी आर्थिक मजबुरी के चलते मजदूरी एवं खेती किसानी के साथ पार्ट टाइम में अपनी पढाई जारी रखकर उच्च शि़क्षा प्राप्त कर सकें। उन्हे शिक्षित करने की बात कही गई थी। इसीलिये मध्य प्रदेश शासन द्वारा सुदुर ग्रामीण क्षेत्रों मे चल रहे उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में ये केन्द्र खोले गये थें। लेकिन हाल ही में उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मे चल रहे सभी परीक्षा केन्द्रों को बंद किये जाने से क्षेत्र के उन ग्रामीण निर्धन बच्चों की उच्च शिक्षा पर ग्रहण लग गया है। जो अपनी विभिन्न मजबुरियों के चलते उच्च शिक्षा प्राप्त करने का स्वप्न देख रहे थें।

दूर-दूर से आते थे छात्र - स्थानीय परीक्षा केन्द्र पर नियमित कक्षाओं मे जाने का बंधन नहीं होने से दूर-दूर से निर्धन एवं आदिवासी छात्र, छात्रायें परीक्षा देने आते थे। नियमित कक्षाओं मे नही जाने की सुविधा के चलते यहां होने वाली परीक्षा मे प्रति वर्ष 800 से 1000 तक परीक्षार्थी सम्मिलित होते थे। अब क्षेत्र के ऐसे समस्त छात्र इस सुविधा से वंचित हो जावेंगे।

व्यापरियों को भी हानि- भोज मुक्त की परीक्षा के समय हजारों की संख्यां मे परीक्षार्थियों के आवागमन से व्यापारियों को भी लाभ मिलता था। पुस्तक व्यापारी से लगाकर हौटल व्यवसायी तक को व्यापार मिलता था। जैसे ही भोज मुक्त दसाई से बंद होने का समाचार मिला विद्यार्थी से लगाकर, पालकगण एवं व्यापारियों मे निराशा छागई। हर किसी का यही कहना है कि दसाई ओर इसका क्षेत्रफल बहूत बडा है यहां स्नातक परीक्षा केन्द्र होना अति आवश्यक है।

कई लोग हुवे लाभान्वित- भोज मुक्त विवि अध्ययन केन्द्र दसाइ्र से कई छात्र उच्च स्तर पर पंहुच कर क्षेत्र के साथ देश की सेवा कर रहे है। इसी केन्द्र के छात्र अन्य विवि मे पीएचडी की डिग्री तक कर चुके है। साथ ही कई लोग विभिन्न रोजगार मे लगें है। वे आज इस केन्द्र की प्रशंसा करते नही थकते है।

इनका कहना है -
मेरा विवाह 1998 में ही हो गया था। जिससे मेरी उच्च शिक्षा दिवास्वप्न ही थी लेकिन भोज मुक्त का परीक्षा केन्द्र दसाई में प्रारंभ हो जाने से मैने स्नातक परीक्षा पास कर ली। ओर अब मै निजी विद्यालय में अध्यापन कार्य करवा रही हुं।  - पूर्व छात्र संगीता मारू

दसाई से भोजमुक्त विवि का अध्ययन केन्द्र बंद हो जाने से हमे दसाई से बाहर परीक्षा देने जाने होगा जिससे हमे समय ओर धन दोनो की हानि होगी। शासन को दसाई मे पुनः यह अध्ययन केन्द्र प्रारंभ करना चाहिये जिससे गरीब बच्चों का भविष्य संवर सके।   - आरती पाटीदार, छात्रा

दसाई में भोजमुक्त अध्ययन केन्द्र बंद हो जाने की जानकारी मिली है इसको मै दिखवाता हू क्या कारण बना है विश्वविद्यालय से जानकारी लेकर बच्चों का भविष्य देखते हुवे इसे पुनः प्रारंभ करवाने का प्रयास करूंगा। - प्रताप ग्रेवाल, विधायक विधानसभा क्षेत्र सरदारपुर

भोपाल में शासन स्तर से लिये निर्णय के अनुसार उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में चल रहे भोज मुक्त विवि के समस्त अध्ययन केन्द्र बंद कर दिये गये है। इसी निर्णय के तहत दसाई का अध्ययन केन्द्र भी बंद हो चुका है। यदि दसाई में नियमित महाविद्यालय होता तो यह केन्द्र उसमें स्थानांतरित हो जाता। - केएस रावत प्राचार्य एवं भोजमुक्त अध्ययन केन्द्र प्रभारी दसाई

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