राजगढ़। गुप्त नवरात्री आषाढ़ शुक्ल प्रति पदा बुधवार दिनांक 3 जूलाई से प्रारंभ होकर 10 जुलाई बुधवार को पूर्ण होंगे। इन आठ दिनों में 10 माह विद्याओं मां महाकाली, मां तारा, मां त्रिपुर सुंदरी, मां भुवनेश्वरी, मां त्रिपुर भैरवी, मां धूमावती, मां बग्लामुखी एवं माता कमलादेवी का पुजन एवं साधना करेंगे। यह दिन तांत्रित क्रियाएं एवं शक्ती साधना तथा महाकाल से जुड़ी साधनाओं के लिए विशेष महत्व रखते है। समुचे नवरात्र में माता के नवरूपों की साधना साधक करेंगे।
नगर के पांच धाम एक मुकाम श्री माताजी मंदिर के ज्योतिषाचार्य श्री पुरूषोत्तमजी भारद्वाज ने यह जानकारी देते हुए बताया की आषाढ़ शुक्ल 2 गुरूवार 4 जुलाई को सिद्धि योग साथ ही चन्द्र दर्शन पर्व रहेगा। बुधवार दिनांक 10 जुलाई को बढ़लिया नवमी पर्व जो की एक अबुझ मुहर्त के अंतर्गत माना गया है। दिनांक 12 जुलाई को देव शयनी एकादशी के साथ ही चतुर्मास व्रतारम्भ हो जावेगा। 16 जुलाई मंगलवार को व्रत की पूर्णिमा के साथ ही गुरू पूर्णिमा महापर्व रहेंगा। इसी दिन चन्द्र ग्रहण भी होगा। इस ग्रहण का स्पर्श मध्यरात्री पश्चात 1 बजकर 33 मिनिट पर होकर मोक्ष अपर रात्री में 4 बजकर 30 मिनीट पर होगा। इस ग्रहण का सुतक मंगलवार दिनांक 16 जूलाई अपरान्ह 4 जबकर 32 मिनट से प्रारंभ होगा। गत संवत वर्ष में भी खग्रास चन्द्र ग्रहण हुआ था। उत्तरा षाड़ा धन राशि एवं मकर राशि मंडल पर मान्य रहेंगा। अतः धन एवं मकर राशि वाले ग्रहण दर्शन ना करें अन्य राशियों में वृषभ, कन्या, धनु एवं मकर के लिए ग्रहण अशुभ तथा मेष, मिथुन, सिंह, ऋषभ राशि के लिए मध्यम तथा कर्क, तुला, कुंभ एवं मिन राषी के लिए यह ग्रहण शुभ फलदायी रहेंगा। ग्रहण में किया गया जप सिद्ध होता है। अतः जिन राशियों के लिए अशुभ या मध्य है उन्हें शुभ में परिवर्तन करने हेतु जप करना चाहिए तथा जिनके लिए शुभ है उन्हें भी जप से वंचित नही रहना चाहिए। 

Post a Comment

 
Top