राजगढ़। एक तरफ जहां आज भी समाज में बेटों के जन्म पर खुशियां और बेटियों के जन्म पर तकलीफ बयां करने वाले मौजूद है तो दूसरी तरफ कई लोग ऐसे भी हैं जो बेटियों के जन्म पर भी ऐसा कुछ करते हैं जो बेटे के जन्म पर किया जाता है। ऐसा करके समाज में बेटियों की महत्तता को प्रतिपादित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाती हैं। ऐसा ही कुछ हुआ राजगढ़ में। नगर के जैन परिवार में दो बेटियों का जन्म क्या हुआ पूरा परिवार खुशियों से भर उठा। अवितकेत जैन और रवीना व अंकुष और रूपल के घर पर बेटी का जन्म हुआ। अविकेत बताते हैं कि उनके पिता की दो संतान है और दोनों ही बेटे हैं। अवितकेत के विवाह के करीब तीन वर्ष बाद हुई संतान जब लड़की के तौर पर घर में आई तो पूरे परिवार में खुशियां ही खुशियां छा गईं। इस अवसर पर शनिवार को एक आयोजन भी किया गया। इस आयोजन में पूरे मोहल्ले में मिठाइयां तो बांटी ही गईं महिलाओं को भी आमंत्रित किया गया। अविकेत बताते हैं कि पिता वीरेंद्र जैन को शुरू से ही बेटी की चाह ही थी। बेटी के जन्म पर उन्होंने ऐसे खुशियां मनाई जैसे बेटे का जन्म हुआ हो। जैन बताते हैं कि जब भगवान बेटा-बेटी में कोई भेदभाव नहीं करता तो हम कौन होते हैं यह सबकुछ करने वाले। बेटा हो या बेटी हमारे लिए हमारी संतान ही सब कुछ हैं।

25 साल बाद घर में गूंजी 2 बेटियों की किलकारी -
घर के वयोवृद्ध तारादेवी जैन बतातीं हैं कि 25 बरस पहले हमारे घर में बड़े पुत्र अशोक के यहां पर बेटी आषिता ने जन्म लिया था उसके बाद छोटे बेटे वीरेंद्र के यहां दो बेटे हुए। 20 वर्ष बाद अशोक के घर तो पोते का जन्म हुआ लेकिन ठीक 25 बरस बाद ऐसा संयोग आया कि वीरेंद्र के बड़े बेटे अविकेत और अशोक के बेटे अंकुश के घर एक ही दिन बेटियों का जन्म हुआ। गौरतलब है कि श्रीमती जैन इन दोनों बालिकाओं की परदादी हैं। इस अवसर पर जच्चा संगीत समारोह का आयोजन भी किया गया जिसमें 100 से अधिक महिलाएं शामिल हुईं।
बेटियों के जन्म पर होगा पौधारोपण
श्री जैन बताते हैं कि बेटियों के जन्म को यादगार बनाने के लिए पूरा परिवार राजगढ़-सरदारपुर बॉयपास पर दोनों तरफ पौधे रोपने की योजना बना रहे हैं। इसमें विशेष बात यह रहेगी कि आगामी दो वर्षों तक इन पौधों के रखरखाव की जवाबदारी भी परिवार की रहेगी। 

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