नई दिल्ली। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) को आज एक बड़ा झटका लगा है। केंद्रीय बैंक के सबसे युवा डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। करीब 7 महीने के भीतर दूसरी बार है जब आरबीआई के किसी उच्‍च अधिकारी ने कार्यकाल पूरा होने से पहले ही अपना पद छोड़ दिया है। इससे पहले आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल ने दिसंबर में निजी कारण बताते हुए अपने पद से इस्‍तीफा दे दिया था। विरल आचार्य को तीन साल के कार्यकाल के लिए 23 जनवरी 2017 को आरबीआई के डिप्टी गवर्नर बने थे। वे आरबीआई की फाइनेंशियल स्टेबिलिटी यूनिट, मॉनेटरी पॉलिसी डिपार्टमेंट, डिपार्टमेंट और इकोनॉमिक एंड पॉलिसी रिसर्च, फाइनेंशियल मार्केट ऑपरेशन डिपार्टमेंट और फाइनेंशियल मार्केट रेग्युलेशन डिपार्टमेंट के इन्चार्ज हैं। इस हिसाब से वह करीब 30 महीने केंद्रीय बैंक के लिए अपने पद पर कार्यरत रहे। डिप्टी गवर्नर के पद पर 3 साल का कार्यकाल जनवरी 2020 में पूरा होना था। पिछले साल उन्होंने आरबीआई की स्वायत्ता का मुद्दा उठाया था। अक्टूबर 2018 में एक भाषण के दौरान आचार्य ने कहा था कि जो सरकार केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता से समझौता करती है उसे बाजार की नाराजगी झेलनी पड़ती है। उस बयान के बाद सरकार और आरबीआई के बीच विवाद खुलकर सामने आ गया था। सरकार से विवादों के चलते 10 दिसंबर 2018 को उर्जित पटेल ने गवर्नर पद से इस्तीफा दे दिया था। उनका कार्यकाल पूरा होने में भी 9 महीने बाकी थे।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक विरल आचार्य अब न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय के सेटर्न स्‍कूल ऑफ बिजनेस में बतौर प्रोफेसर ज्‍वाइन करेंगे। आईआईटी मुंबई के छात्र रहे आचार्य ने 1995 में कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग में स्नातक और न्यूयार्क विश्वविद्यालय से 2001 में वित्त में पीएचडी की है। वर्ष 2001 से 2008 तक आचार्य लंदन बिजनेस स्कूल में रहे। अहम बात यह है कि डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने कार्यकाल पूरा होने के करीब छह महीने पहले ही अपने पद को छोड़ दिया है। विरल आचार्य आरबीआई के उन बड़े अधिकारियों में शामिल थे जिन्‍हें उर्जित पटेल की टीम का हिस्‍सा माना जाता था। बताया जा रहा है कि उर्जित पटेल के इस्तीफे के बाद से आचार्य असहज महसूस कर रहे थे। हालांकि पटेल के इस्तीफे के बाद आचार्य के इस्तीफे की अटकलें भी शुरू हो गई थीं। आचार्य के इस्तीफे के बाद रिजर्व बैंक में तीन डिप्टी गवर्नर- एन एन विश्वनाथन, बी पी कानूनगो और एम के जैन बचे हैं। विश्वनाथन का कार्यकाल जुलाई के पहले हफ्ते में पूरा हो रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उनका कार्यकाल 2 साल और बढ़ाया जा सकता है।

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