भोपाल। इस साल मेडिकल में दाखिला लेने वाले छात्रोंं के लिए अच्छी खबर हैं। उन्हें पिछले सालों की तुलना में और कम अंकों में सरकारी मेडिकल कॉलेजों में दाखिला मिल सकता है। इसकी वजह यह कि सभी मेडिकल कॉलेजों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रोंं को 10 फीसदी आरक्षण देने के लिए एमबीबीएस की 650 सीटें बढ़ाने की तैयारी है। इसके लिए चिकित्सा शिक्षा संचालनालय (डीएमई) ने मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) को प्रस्ताव भेजा है। प्रदेश के 6 पुराने और 7 नए कॉलेजों को मिलाकर कुल 13 कॉलेज हैं। 800 सीटें पुराने कॉलेजों में व उतनी ही नए कॉलेजों में हैं। कमजोर वर्ग के छात्रों को आरक्षण देने की शर्त है कि पहले से अनारक्षित वर्ग के उम्मीदवारों के लिए तय सीटें कम नहीं होनी चाहिए। इस शर्त का पालन करने पर 150 सीट वाले चार कॉलेज इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर में 188 सीटें करना होंगी। एमसीआई के मापदंड 150 सीटों या 250 सीटों के लिए तय हैं। ऐसे में 188 सीटों की जगह 200 सीटें होने की उम्मीद है। इस तरह इन चार कॉलेजों में एमबीबीएस की 200 सीटें बढ़ जाएंगी। बाकी 9 कॉलेजों में 450 सीटें बढ़ने की उम्मीद हैं।
2018-19 के सत्र में अनारक्षित वर्ग के लिए पहले चरण में कट-आफ अंक 517 गया था। इसके बाद तीन और कॉलेजों को मान्यता मिलने से करीब 500 अंक तक मेरिट आ गई थी। इस साल तीन नए कॉलेजों की 300 सीटें बढ़ गई हैं। आर्थिक कमजोर वर्ग के छात्रों के लिए 650 सीटें बढ़ती हैं तो अनारक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को 450 अंक तक में दाखिला मिल सकता है।

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