विशेष संवाददाता सुमित राठौर।
झाबुआ। सरकारी स्कूल का ख्याल आते ही, हमे पुराने कमरे, फटी दरी एवं आंगन में बैठे छात्र, बदहाल पानी एवं बिजली की व्यवस्था और स्कूल परिसर में भ्रमण करते आवारा पशु की याद आ जाती है, लेकिन अगर आपको हम कोई एक सरकारी स्कूल से रूबरू करवाएं, जिसमें एडमिशन के लिए बच्चे प्राइवेट स्कूल छोड़कर शासकीय स्कूल आते हैं तो आप इस पर विश्वास नहीं करेंगे।
 जी हां हम आपको ऐसे ही एक झाबुआ जिले की शासकीय उत्कृष्ट बालक प्राथमिक विद्यालय झकनावदा की ओर ले चलते हैं, जहां कमरों एवं विद्यालय भवन की दीवारों पर शानदार पेंटिंग्स बनी हुई। जिसमें फ्लावर्स नेम, फल फ्रूट के नेम गिनती पहाड़ा आदि बनाए गए है। साथ ही स्कूल में आरो की मशीन लगाकर छात्रों के पीने के लिए साफ पानी, बच्चों के खेलने के लिए केरम बोर्ड, फुद्दी-बेड, बेट-बल्ला ,सोशल मीडिया एक्टिविटी के लिए कंप्यूटर प्रिंटर जैसी विशेष व्यवस्थाएं है। तो एक बार इस और विश्वास करना मुश्किल होता है, लेकिन ऐसा ही कुछ हो रहा है झकनावदा शासकीय उत्कृष्ट बालक प्राथमिक विद्यालय, में यह संभवतः झाबुआ जिले के झकनावादा की सरकारी स्कूल में ही सुविधाएं है जहां यह प्राइवेट स्कूल को छोड़कर एडमिशन के लिए सरकारी स्कूल में होड़ लगी रहती है।
निजी स्कूल की तरह डेवलप
आपको बता दें कि इस विद्यालय को शासकीय स्कूल को प्राइवेट विद्यालय की तरह बनाने का  प्रधान अध्यापक हेमेंद्रकुमार जोशी द्वारा ठान लिया गया था कि उक्त स्कूल प्राइवेट जैसा बनाना है और आज यह तस्वीर उभरकर जिले के झकनावदा में सामने हैं और आपको बता दें कि यहां शिक्षा के साथ सोश्यल एक्टिविटी, धार्मिक गतिविधि एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम संगीत की भी कई क्लास लगती है इस स्कूल को देख कई बार प्रशासन द्वारा सराहना भी की गई है।
स्कूल संस्था द्वारा स्टेशनरी सामग्री की भेंट
नवीन शैक्षणिक सत्र में स्कूल के शुभारंभ में नवीन स्कूल बच्चों को तिलक लगाकर अगवानी की गई। साथ ही स्कूल छात्रों के पालकों को स्कूल में बुलवा कर एवं साथी पूर्व सांसद प्रतिनिधि अजय वोहरा, मनीष कुमट गोपाल विश्वकर्मा ने  स्कूल संस्था द्वारा स्कूल बैग कॉपी पेन आदि छात्रों को निशुल्क प्रदान किए। इस स्कूल की एक और विशेषता यह है कि इस वर्ष  मप्र के भोपाल में शासन द्वारा शासकीय स्कूलों में जो नर्सरी स्कूल की शुरुआत की गई है, उसी तर्ज पर प्रधानाध्यापक हेमेंद्र जोशी द्वारा झाबुआ जिले के झकनावदा में भी प्राइवेट स्कूल जैसी नर्सरी स्कूल की शुरुआत की गई है। जिसमें बच्चों के खेलने पढ़ने की मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाई गई है। श्री जोशी ने बताया कि हमारा एक लक्ष्य है कि 1 वर्ष में हम छात्रों को 6 ड्राइंग बुक दे, जिससे कि वह चित्रकला में रुचि रखकर एक अच्छे पेंटर बन सके।

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