जगदीश चौधरी, खिलेडी। सिलोदा समीप पंचमुखी गांव मे चल रही पं. नागर जी की भागवत कथा मे कहा मूर्ख मेरे गुरु हैं तो गुरु कुछ भी बोले तो चेले को केवल सुनना चाहिए। इसलिए मूर्ख बोले तो अपने को चेले बनकर बस सुनना चाहिए जो बड़ा बनता है उसे बड़ा बनने दो अपन छोटा चेला बनकर उनकी बात सुन लो जीवन में आदमी को बड़ा बनने में आनंद है कि छोटा बनने में अगर छोटा बनने में है तो छोटा बनकर रहे धन दौलत खेती-बाड़ी कारखाना यदि भगवान दे और बड़ा आदमी बनाएं और दिल छोटा बनाएं तो जीने का मजा नहीं आए भगवान से यह प्रार्थना करें की हे भगवान अगर हमें बड़ा बनाए तो दिल भी जरूर बडा बनाएं दिल बड़ा होना जरूरी है। भले बाकी सब चीज खेती-बाड़ी सब कम होगा तो चलेगा पर दिल जरूर बडा होना चाहिए  चौथे दिन कथा में भगवान के जन्म के दिन की कथा नागर जी ने सुनाई । वासुदेव व देवकी के यहां जेल में भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ है हमें भजन करना चाहिए .मनुष्य जन्म अनमोल जन्म है हमें बिना मोल मिला है इसका महत्व जान लो और कार्य ऐसा करो की बाद में नहीं पछतावा ना हो कि समय रहते हमें भक्ति तो करनी ही नहीं पाए यह  बात पंचमुखी में चल रही भागवत कथा के चौथे दिन  भागवत में भगवान के जन्मोत्सव पर कथा में सुनाते  पंडित कमल किशोर नागर जी ने कही इस दौरान कृष्ण जन्म प्रसंग मनाया गया।  नागर जी ने बताया कि अपने नैन मन धन की गति पर निरंतर आवश्यक है यदि यह सद्गति में हो तो निश्चय ही आप सफल हुए यह सब प्रयासों के सब कार्यों में लगते हैं तभी आप सच्चे अर्थों में ईश्वर को प्राप्त करने में सफल हो सकते हैं आप स्वयं अपने गुरु हो आप का कार्य आपका गुरु है उसी से मार्गदर्शन ले यह धन जो आपके पास है यह जिसने दिया है वह अच्छे उपयोग के लिए दिया है इसका पूरा उपयोग अपने लिए भी बुरा साबित होगा मन को समझना है।  रे चतुर मन को समझना प्रभु चरण में ध्यान लगाना है और कहीं मत जाना चतुर नार मन को समझना आदि भजनों की नागर जी ने सुनाएं मन की गति को नापना संभव नहीं है इस पर नियंत्रण ही लगाया जा सकता है और इस पर निरंतर सत्संग के द्वार ही लगाया जा सकता है सत्संग में भी यह कार्य शब्द द्वारा किया जाता है उन्हें कथा के दौरान कहा की जीवन उस गाड़ी का नहीं है उसकी जगह कोई दूसरी मिल जाए यह स्टेशन जैसा नहीं है दूसरा मिल जाए यह छोटा तो फिर मिलता है मुश्किल है सत्संग आपके बुरे कर्मों को दूर करता है।  इसीलिए जहां भी सत्संग मिले उसका लाभ लेना छोड़ना नहीं अच्छे लोगों की सत्संग में भी रहेंगे जो भगवा भगवत भक्ति करते हैं आप भी कर जाओगे जैसे लोहे की कील पानी में डूब जाती है और लकड़ी को पानी में डालने के बाद तैरने लगती है जैसे दूध में मिलने के बाद पानी की कीमत बढ़ जाती  शरीर पर दुख बड़े से बड़े शरीर में दोष मत आने देना पीछे मत हटना क्योंकि उसके बाद ही सुख आता है धन उधार ले सकते हो पुण्य नहीं पुण्य आपको जैसे संस्कार से मनुष्य को सकारात्मक परिणाम प्राप्त होते हैं । पंचमुखी में नागरजी की कथा में प्रति दिन बड़ी संख्या में भक्त  तेज गर्मी के बाद भी कथा सुनने पहुँच रहै।

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