जगदीश चौधरी, खिलेडी। समिप गांव पंचमुखी मे झाला परिवार के द्वारा आयोजित हो रही नागरजी की चल रही श्रीमद् भागवत कथा के पाँचवें दिन दिव्य संत पं.कमल किशोर नागरजी कृष्ण के जन्म के बाद की कथाओं के प्रसंग कहें ओर जिस तरह धर्म की तड के लिए लड़ रहै हो जरा भक्ति करलो सब तड दुर हो जाएगी नागरजी ने कहा जब कृष्ण की कंष मामा से तो बलराम से सभी आपस में तड होगई तब भगवान कृष्ण ने अपनी चिटी उँगली पर पुरे गोवर्धन पर्वत को उठा लिया ओर सभी को एक पर्वत के निचे सभी एक जगह लादीया ओर सभी तड दुर कर दी।  उसी तरह यह भारत वंश भी एक है एक धर्म है केवल धर्म के लिए लड़ते हो धर्म इस लिए धर्म को मत छोडो । शर्म आंख में है शर्म और धर्म मत छोड़ना आपके उपर कितनी भी परेशानी केसी भी परिस्थिति आजाए तो भी शर्म ओर धर्म को नहीं छोडना चाहिए कोई कहे कुछ भी कहे कहो की उसकी शर्म उसके पास हमारी शर्म हमारे पास। नारी मे सिथीलता होगी शर्म होगी लाज होगी वो नारी देवी के समान होगी।  वहीं कहाँ जब हम 40 हजार 50 हजार की गाय लाते हैं पर उसकी सेवा नहीं करते है तो अनात हो जाती है तब उसकी जगह गो शाला होजाती है हमें गौ माता की सेवा करनी चाहिए इस लिए गाय को अनाथ मत होने दो स्वयं गो माता की सेवा करनी चाहिए उसी तरह माता पिता की भी सेवा करनी चाहिए जब माता पिता की देख रेख का समय आता है तब चार चार बेटे होने के बाद भी बेटे माता पिता को अनाथ आश्रमो मे छोड़ देते हैं ये गलत है माता पिता ने आपको पढ़ाया लिखाया बड़ा बनाया ओर आज उनको अनाथ कर दिया ये सब समय के बदल रहा है  थोड़े दिन ओर रुको   वो दिन दुर नहीं है की सब काम फोन वाटसाप आदी पर ही होजाएगा मा बेटे के प्रसंग जब यह मार्मिक प्रसंग सुना रहे। दिव्य संत पं.कमल किशोर नागरजी जब यह मार्मिक प्रसंग सुना रहे थे, उनकी आंखों से अनायास आंसू छलक पड़े। पांडाल में उपस्थित हजारों श्रोता भी अपने आंसू नहीं रोक सके। कुछ पल के लिए शब्द तिरोहित हो गए.भक्ति की साक्षात अनुभूति होने लगी। इस लिए भगवान का भजन करो भगवान मेरा कोई नहीं आप के सिवाय मेरा कोई नही एक आसरो एक विश्वास है बस प्रभु आप ही आप हो इस लिए सभी को रोज सुबह भगवान के दर्शन करने चाहिए ओर रोज नियम से रोज मंदिर जाना चाहिए भगवान के दर्शन कर जीवन को धर्म भक्ति से जोडना चाहिए।  रोज चतुर्भुज श्री विग्रह का ध्यान करो, उन्हें साष्टांग प्रणाम करो। क्योंकि समय का चक्र और शंख दोनों उनके हाथ में है। जब समय चक्र परेशान करे तो प्रार्थना करो कि प्रभू थोड़ा सा शंखनाद कर दे। मंदिर में शंख, घंटियां और जयघोष की ध्वनियां अधर्म को ललकारती है। पूजा, पुर्ण भजन, साधना या शुभ कार्य में विध्न आए तो उससे डरो नहीं, शिव की आराधना कर लो जिस समय जो बने वो कर लेना चाहिए सभी राम और कृष्ण का सार्वजनिक अवतार है उन्होंने कहा कि हम चित्र अच्छे खींच रहे हैं, लेकिन चरित्र में गिर रहे हैं। जबकि राम के चरित्र पर ही रामचरित मानस की रचना हुई थी।तुम खुशी में समय दो, वह दुख में साथ देगा पं.नागरजी ने कहा कि गुरु-गोविंद दोनों कभी अपनी कीमत नहीं करते हैं। वे नोट, नारियल, फूल, मिठाई या पूजा सामग्री से खुश नहीं होते हैं, वे तो स्वयं दाता हैं। हम उन्हें केवल समय दे सकते हैं, यहां पैसा भी काम नहीं आएगा।

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