विनोद सिर्वी, धुलेट। इस बार अत्यधिक पाला गिरने से किसानों की फसलें खराब हुई थी उत्पादन तो कम हुआ है साथ ही फसलों की क्वालिटी भी बिगड़ी। इसी वजह से गेहूं की गुणवत्ता खराब हो गई थी। मंडी में भाव कम मिलने से किसानों ने समर्थन मूल्य में बेचने के लिए गेहूं अपने घरों में भर रखे थे। उम्मीद थी कि प्रतिवर्ष अनुसार इस वर्ष भी गेहूं समर्थन मूल्य में बिक जायेंगे परंतु इस बार प्रत्येक खरीदी केंद्र पर सर्वेयर की नियुक्ति की गई।और अच्छी क्वालिटी के गेहूं लेने का निर्णय किया। आदिम जाति सेवा सहकारी केंद्र राजगढ़ पर 17 गांव के 891 किसानों ने 2282 हेक्टेयर जमीन से गेहूं का पंजीयन करवाया परंतु अभी तक 68 किसानों ने 2784 कुंटल गेहूं तोले। अधिकतर किसानों के गेहूं मानक रूप से नहीं आने पर रिजेक्ट किए गए व जिन किसानों के गेहूं तू ले उनमें से अधिकतर के छलना लगवाया गया। गांव धुलेट के किसान दिनेश पिता रतनलाल ने बताया कि मैं भाड़े का ट्रैक्टर मैं गेहूं लेकर खरीदी केंद्र पर आए  परंतु है माल नहीं है यह कहा तो   किसान भड़क गया सोसायटी वालों ने गेहूं की जांच कर अमानक घोषित कर दिया। किसान मोहनलाल सतपुड़ा, रवि ठाकुर, नेमा लाल सिर्वी, हरिराम आदि ने बताया कि हम कई वर्षों से समर्थन मूल्य में गेहूं बेच रहे हैं।परंतु इस बार जितनी समस्याएं आई उतनी  कभी नहीं आई।एक तो पाले की मार दूसरी ओर से समर्थन मूल्य मैं गेहूं मानक रूप से नहीं बैठ रहे अब करे तो क्या करें सस्ते भाव में मंडी में बेचने को मजबूर हो गए हैं।

इस संबंध में आदिम जाति सेवा सहकारी संस्था राजगढ़ के सर्वेयर राजकुमार सोलंकी से बात की तो उन्होंने बताया कि दिनेश पिता रतन लाल के गेहूं में जले हुए गेहूं की मात्रा 4.50 % क्षतिग्रस्त गेहूं की मात्रा 17 % अन्य खाद्यान्न 2% और घुन पाए जाने के कारण उपरोक्त गेहूं निरस्त किए गए हैं। क्योंकि उक्त गेहूं मानक रूप से नहीं आ रहे थे। वही है हम्माल नहीं होने के संबंध में आ. जा. सेवा सहकारी संस्था राजगढ़ के प्रबंधक सुनील जायसवाल से बात करना चाही तो बात नहीं हो पाई।

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