रायपुर। महासमुंद जिले के पिथौरा में आदर्श लाख पालन योजना के तहत रंगीनी एवं कुसमी लाख का उत्पादन एवं प्रसंस्करण किया जा रहा है। वन विभाग द्वारा महिलाओं के स्व सहायता समूहों को प्रसंस्करण से जोड़ा गया है, जिससे करीब 250 महिलाओं को स्वरोजगार मिल रहा है। उन्हें अच्छी आय भी हो रही है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री राकेश चतुर्वेदी ने आज महासमुंद जिले के प्रवास के दौरान इस प्रसंस्करण केन्द्र का अवलोकन किया। उन्होंने स्व सहायता समूहों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर प्रसंस्करित लाख के संबंध में चर्चा की। श्री चतुर्वेदी ने पिथौरा में लाख पालन की संभावनाओं को देखते हुए 20 हजार पलाश एवं 05 हजार कूसुम के वृक्षों के लिए विस्तृत लाख पालन परियोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि लघु वनोपज पर आधारित उद्योग के तहत लाख उत्पादन का जिले में अधिक से अधिक विस्तार किया जाए जिससे अधिक से अधिक महिलाएं स्वरोजगार से जुड़कर आत्म निर्भर हो सके। समूह की महिलाओं ने बताया कि पलाश के पेड़ में रंगीनी लाख तथा कूसुम के पेड़ पर कुसमी लाख का उत्पादन किया जाता है, जिसे उनसे लघु वनोपज संघ द्वारा रंगीनी लाख को 150 रूपए प्रति किलो और कुसमी लाख को 225 रूपए प्रति किलो की दर से खरीदा जाता है। लघु वनोपज संध द्वारा लाख को नीलामी के द्वारा विक्रय किया जाता है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने बागबाहरा परिक्षेत्र के प्राथमिक वनोपज सहकारी समिति, टूहलू के तेंदूपत्ता संग्रहण केन्द्र एवं विभागीय संग्रहण वाले कोमाखान समिति का आकस्मिक निरीक्षण किया। उन्होंने नरवा, गरवा, घुरवा बाड़ी योजना अंतर्गत बागबाहरा परिक्षेत्र में विकसित किए जा रहे मचका नाला में प्रस्तावित भू-जल संरक्षण कार्य के स्थल का भी निरीक्षण और नदी के किनारे वृक्षारोपण संबंधी आवश्यक निर्देश दिए।  बैठक में उन्होंने अधिकारियों से महासमुंद जिले के तेंदूपत्ता सीजन वर्ष 2019 में तेंदूपत्ता संग्रहण के कार्यों की प्रगति की जानकारी ली। इस दौरान वन विभाग के अधिकारियों ने बताया की जिले के विभिन्न 13 समितियों में विभागीय संग्रहण का कार्य किया जा रहा है। इस वर्ष जिले में 95 हजार 400 मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहण करने का लक्ष्य है। जिसके विरूद्ध 16 मई तक 67227 मानक बोरा तेंदूपत्ता का संग्रहण किया गया है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने अधिकारियों को उच्चगुणवत्ता वाले तेंदूपत्ता का संग्रहण करते हुए लक्ष्यपूर्ति करनेे को कहा।  श्री चतुर्वेदी ने कहा कि वन अधिकार मान्यता पत्रों से संबधित लंबित आवेदनों का जिला प्रशासन से समन्वय स्थापित कर जल्द निराकरण किया जाए। उन्होंने कहा कि तेन्दुपत्ता संग्राहकों को दी जाने पारिश्रामिक की राशि का भूगतान समय पर किया जाए। उन्होंने पिथौरा परिक्षेत्र के चारागाह विकास एवं दुग्ध उत्पादन क्षेत्र गोड़बहाल में रोजगारमूलक कार्यों का अवलोकन किया। 

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