सरदारपुर। बंजर भूमि पर मेहनत कर वन विभाग हरियाली में तब्दील करने में लगा हुआ है। राजस्व विभाग से मिली बंजर भुमि पर अब वन विभाग पौधारोपण कर वन परिक्षैत्र विकसीत करेगा। सरदारपुर तहसील क्षैत्र के कालीकराई-पंचरूडी मार्ग पर करीब 36 हैक्टर पथरिली  बंजर भुमि पर वैक्लपीक पौधारोपण कार्य की तैयारिया वन विभाग ने पुर्ण कर ली गई है। शासन के द्वारा एक सिंचाई परियोजना मे वन भुमि का उपयोग करने पर वन विभाग को करीब 36 हैक्टर भुमि  हस्तानतरित की गई है। इस भुमि पर वन विभाग द्वारा व्यापक पैमाने पर पौधारोपण कर इसे हरित क्षैत्र मे तब्दील किया जायेगा। उक्त भुमि पर यदि पौधारोपण सफल होता है तो जल संवर्धन के क्षैत्र मे उल्लेखनीय प्रगति होगी।

 4 - 5 प्रजाति के फलदार और फुलदार पौधो से हरीभरी होगी बंजर भूमि -
कालीकराई-पंचरूडी मार्ग पर वन विभाग को मिली 32.490 हैक्टर और 4.05 हैक्टर भुमि पर पौधारोपण होगा। उक्त बंजर भूमि विभाग को गंधवानी क्षैत्र मे बलकुंडा परियोजना मे वन भुमि के उपयोग के बदले मे मिली है। विभाग के द्वारा वैकल्पिक पौधारोपण के लिये भुमि के चारो और से सीमेंट के पोल गाडकर तार फेंसिग का कार्य लगभग पुर्ण हो चुका है। परिक्षैत्र की सुरक्षा के लिये  उक्त क्षैत्र मे गार्ड के लिये एक कक्ष का निर्माण भी प्रस्तावित है। वन विभाग के वन परिक्षैत्राधिकारी भुपेन्द्र सोंलकी ने एक जानकारी में बताया की 50 हजार से अधिक गड्डे खोदकर उनमे 4 से 5 प्रजाति के फलदार और फुलदार पौधो का रोपण किया जायेगा। साथ ही पौधो के लालन पालन पोषण उचित तरह से हो इसके लिये 2 चैक डेम एवं छोटी-छोटी तलैया भी बनाई जायेगी। जिसमे जल संग्रहण होकर पौधो को पानी भी मिलेगा। गड्डे खुदाई कर उनमे काली मिट्टी एंव देशी खाद भी डाला जा रहा है। उक्त परियोजना में कार्य मजदुरो से करवाया जा रहा है। जिन्हे प्रतिदिन 282 रूपये के तय दर से  मजदुरी दी जा रही है।

पथरीला क्षेत्र बदलेगा हरियाली में - 
वन परिक्षैत्राधिकारी श्री सोंलकी ने बताया की माह दिसंबर से कार्य प्रारंभ हुआ है। जिसे इसे एक वर्ष में पुर्ण करना है। वर्षा काल मे खोदे गये गड्डो मे पौधा रोपण किया जायेगा। जिसमे सागौन, नीम, आवला, महुॅआ सहित 6 प्रजाति के पौधे रोपे जायेगे। यदि यह वैकल्पिक पौधारोपण सफल होता है तो निश्चित ही पथरिले क्षैत्र को हरियाली मे बदला जा सकता है। गौरतलब है की सरदारपुर तहसील मे पिछले 2 से तीन वर्षो मे हजारो ही नही लाखो पौधे लगाये गये  उन पर  करोडो रूपया भी खर्च हुआ। लेकिन एक प्रतिशत भी पौधे धरातल पर जीवित नही बचे। कारण उचित देखभाल नही होना। अब यहां देखना यह है की क्या वन विभाग वैकल्पिक वन परिक्षैत्र को मुर्त रूप दे पायेगा।

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