राजगढ़। भगवान महावीर स्वामी के बरसों पुराने मंदिर के जीर्णोद्धार व 7 दिनों तक अंजनशलाका महोत्सव के बाद बुधवार को भगवान महावीर स्वामी की प्राण-प्रतिष्ठा 4 आचार्यों की निश्रा में हुई। आयोजन समिति ने पूरे नगर के लोगों के लिए नगर चौरासी का आयोजन कर सहभोज कराया। इसमें बड़ी बात यह रही कि हर समाज और वर्ग का व्यक्ति भगवान महावीर स्वामी के प्रसाद को ग्रहण करने के लिए एक छोटे से आग्रह पर पहुंच गया। मोहनगार्डन और जीण में हुए सहभोज के आयोजन में करीब 20 हजार से ज्यादा प्रभु भक्तों ने प्रसादी ग्रहण की। लाभार्थी परिवार शैलेंद्र कुमार शैतानमल जैन परिवार रहा।
भगवान महावीर स्वामी के जन्म कल्याणक अवसर पर नगर के हाथीवाला मंदिर के रूप में विख्यात महावीर स्वामी मंदिर में भगवान महावीरजी की प्राण-प्रतिष्ठा की गई। इसके साथ ही 24 जिनालयों में अन्य भगवान को भी विराजित किया गया। पूरे विधि-विधान के साथ यह आयोजन सुबह शुभ मुहुर्त में हुआ। मालव भूषण तप शिरोमणी आचार्यश्री नवरत्न सागर सूरीश्वरजी के पट्टधर युवाचार्य श्री विश्वरत्न सागर सूरीश्वरजी, गच्छाधिपति आचार्य श्री ऋषभचंद्र सूरीश्वरजी, आचार्य श्री नरेंद्र सूरीश्वरजी व आचार्य श्री मृदुरत्न सागर सूरीश्वरजी की निश्रा में यह प्रतिष्ठा संपन्न हुई। 11 से 17 अप्रैल तक चले इस महोत्सव में नगर के जैन समाज ने पूरी भक्ति भावना से इस उत्सव में भाग लिया। सुबह 11ः30 बजे से मोहन गार्डन व गार्डन के ठीक सामने जिण में फले चुन्दड़ी (सहभोज) का आयोजन हुआ। इसमें महिलाओं व पुरूषों के लिए अलग-अलग बैठक व्यवस्था रखी गई थी। गर्मी का अहसास ना हो इसलिए समूचे पांडाल को विशालकाय कूलरों से ठंडा करने का प्रयास तक किया गया। बड़ी बात यह रही कि इस आयोजन में नगर के तमाम धार्मिक व सामाजिक मंच सहित हर धर्म के व्यक्ति ने सहभागिता कर आयोजन को सफल बना दिया।

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