जगदीश चौधरी, खिलेडी। कथा के पहले दिन मालवामाटी के संत व मां सरस्वती के वरद पुत्र पं. कमलकिशोरजी नागर ने कथा मे कहाँ अच्छे लोग होते है अच्छे कार्य करने वाले होते हैं उनकी हमेशा सहारना करना चाहिए। गांवो में प्रेम मिलता है। प्रेम के आगे पेसो का कोई महत्व नही होता है। वैशाख मास जैसे श्रेष्ठ है उस में भागवत की कथा हो और वह गौशाला परिसर में हो तो उसमें हमें सभी प्रकार के क्षेत्र से अनेक फल प्रशंसा मिलती है। जीवन में दो चीजों का ध्यान रखना चाहिए पहली दूध को जब तक उकालते रहो जब तक उस का मावा नहीं बन जाता ओर उसी तरह भजन तब तक करते रहो जब तक भगवान की प्राप्ति नहीं हो सके जिस जिसने भजन किया उसे भगवान दिखे है इस लिए भजन कीर्तन करना चाहिए सतत भजन करते रहना चाहिए। नागरजी ने कथा मे भजनों पर महिलाओं ने बीच कथा पांडाल नाचते हुए  भजन कीर्तन का आनंद लिया। श्रीमद् भागवत कथा के पहले दिन सुबह 11 बजे पंचमुखी गांव के श्री राम मंदिर से बैंड-बाजों के साथ कलशयात्रा निकाली गई, जिसमें  युवती व महिलाएं कलश यात्रा मे शामिल थी व आयोजन कर्ता झाला परिवार के एवं मुख्य यजमान मेहरबान सिंह झाला भागवत पुराण को सिर पर रख कर चल रहै थे गर्मी के चलते चल समारोह के आगे आगे रास्ते रास्ते पानी का छिटकाव करते चल रहै थे कलश यात्रा राम मंदिर से कथा स्थल के पास हनुमान मंदिर पहुँचे यहाँ से सभी नाचते हुए कथा पांडाल व्यास पिट पहुँचे वहां झाला परिवार के द्वारा व्यास पुजन मेहरबान सिंह झाला व परिवार के सदस्यों ने कथा के पहले पुजन पाठ आचार्यो के द्वारा कराया गया।
 कथा शुरु होने से पहले व्यास पुजन कर व्यासपिट के पास गोशाला की एक गो माता को आकृषक सजा कर कथा पांडाल मे लाये ओर झाला परिवार ने पहले गो माता का पुजन वदन किया गाय व बछडे का पुजन किया गया उसके बाद ओम नमो भगवते वासुदेवाय का जाप किया गया जाप के बाद नागरजी ने कथा प्रारंभ की कथा 12 बजे से 3 बजे तक चलेगी गर्मी को देखते समिति के सदस्यों ने दोपहर में पांडाल के आसपास भी पानी का छिटकाव करते रहै कथा के पहले दिन बड़ी संख्या में ग्रामीण दुर दुर से उज्जैन, देपालपुर, रतलाम, झाबुआ, कुक्षी, राजगढ़, लाबरिया, राजोद, बदनावर,बरमडल, दसई,खिलेडी, फुलेडी, टकरावदा, धार आदी कई जिलो व गांवो से बड़ी संख्या में ग्रामीण नागरजी की कथा सुनने आये पहले दिन ही पहुचे। आयोजन स्थल पर पार्किंग से लेकर भोजन व ठहरने तक की उचित व्यवस्था है गर्मी को देखते।आसपास के गांवो के ग्रामीणो दस से ज्यादा पानी के प्याव लगाये गये वहीं कई ग्रामीणो बड़ी संख्या में भोजन शाला मे सेवा करने पहुँचे है। वही 15 से अधिक अलग-अलग आयोजन समिति के सदस्यों के द्वारा आयोजन में सेवा कर रहे हैं।

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