राजगढ़। दादा गुरुदेव श्रीमद्विजय राजेन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. की पाट परम्परा के अष्ठम पट्टधर वर्तमान गच्छाधिपति आचार्यदेवेश श्रीमद्विजय ऋषभचन्द्रसूरीश्वरजी म.सा., मुनिराज श्री पुष्पेन्द्रविजयजी म.सा., मुनिराज श्री रुपेन्द्रविजयजी म.सा., मुनिराज श्री जीतचन्द्रविजयजी म.सा., मुनिराज श्री जनकचन्द्रविजयजी म.सा. एवं वरिष्ठ साध्वी श्री किरणप्रभाश्री जी म.सा., साध्वी श्री सद्गुणाश्रीजी म.सा., साध्वी श्री संघवणश्री जी म.सा. आदि ठाणा की सानिध्यता में मुनिराज श्री जिनचन्द्रविजयजी म.सा. का 21 वां जन्मोत्सव जीवदया दिवस के रुप में मनाया गया । इस निमित्त दोपहर में श्री गुरुपद महापूजन का आयोजन हुआ ।
समस्त मुनिभगवन्तों ने जिन मंदिर व गुरु समाधि मंदिर में दर्शन वंदन किये और विशाल चल समारोह के साथ कुन्दन गौशाला में गये । यहां विराजित प.पू. गच्छाधिपति आचार्यदेवेश श्रीमद्विजय ऋषभचन्द्रसूरीश्वर जी म.सा. से आशीर्वाद प्राप्त कर लाभार्थी परिवार द्वारा गौशाला में गायों को गुड़, लापसी, हरी घास आदि आहार दिया गया । तत्पश्चात् धर्मसभा में आचार्यश्री ने आशीर्वाद प्रदान करते हुये मुनिश्री व समाजजनों को प्रेरणादायी उद्बोधन देते हुये कहा कि 84 लाख जीवयोनियों में मानव योनि ही धर्म के क्षेत्र में साधना आराधना कर अपनी आत्मा का कल्याण कर सकती है । मुनिराज ने 12 वर्ष की आयु से ही हमारे सानिध्य में आ गये थे । अपनी आत्मा के कल्याणार्थ दीक्षा प्राप्त कर अपना जीवन जिन शासन की सेवा में समर्पित किया है मैं इनके उज्जवल भविष्य की कामना करता हुॅं । इस अवसर पर सभी मुनि भगवन्तों ने व साध्वीवृंद ने भी अपनी-अपनी शुभकामनाओं के साथ अपने मन के उद्गार व्यक्त किये।

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