कुशाल राठौड़, पेटलावद।  रंगोउत्सव पर्व रंगपंचमी में निकाली जाने वाली गैर में क़रीब दो तीन वर्षों से नगर व आस पास के क्षेत्रवासी गैर में हिस्सा नही ले रहें है, जिसका कारण दो तीन वर्षो से पेटलावद में निकाली जाने वाली गैर में होली खेलते खेलते जमकर एक दूसरे के कपड़े फाड़े जाते है जिससे सम्मानिय व वरिष्ठ नागरिकों को शर्मिन्दगी महसूस होती है।  आपको बता दे कि कपड़ा फाड़ गैर के कारण नगर की महिलाएं व बच्चे भी रंगोउत्सव की गैर  को देखने से वंचित रह जाते है, धार्मिक प्रवृत्ति के लोग गैर का हिस्सा बनने में ख़ुद को शर्मिंदा महसूस करते है। कपड़ा फाड़ होली भारत की सनातन संस्कृति के अनुरूप नहीं है। यह अच्छी बात नहीं कि होली के नाम पर आपस मे एक दूसरे के कपड़े फाड़े जाए, यह होली का पर्व सद्भावना और भाईचारे का है, लोग एक दूसरे पर रंग डालकर जश्न मनाते है, लेकिन ऐसे आयोजन में फूहड़ता और अश्लीलता नहीं होनी चाहिए। कार्यक्रम आयोजकों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की रंगोउत्सव के इस पावन पर्व में मर्यादा को कायम रखना जरूरी है।  रंगपंचमी गैर मैं कपड़ा फाड़ होली पर रोक लगना चाहिए ताकि क्षेत्र व नगर के सम्मनीय व वरिष्ठ लोग गैर का हिस्सा बन सके व नगर की महिलाए व बच्चे भी नगर से निकलने वाली गैर को देख कर इस भव्य आयोजन का आनंद ले सकें।।
नगर के व्यापारी मनीष गांधी (संयम श्री) ने बताया की कपड़ा फाड़ होली आपसी विवाद की जड़ है, जिसके चलते शरीर को नाखूनों से कष्ट होता है। आयोजनकर्ता को इस विषय पर विचार करना चाहिए, ताकि सभी गैर का हिस्सा बन सके। वही नगर के  अजय अग्रवाल ने बताया की  इस प्रकार की गैर में शामिल हो कर मूर्खता का परिचय देना है, दो-तीन वर्षो से कपड़ा फाड़ गैर के चलते मित्र लोग गैर में जाना पसंद नही करते है।

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