राजगढ़। सकल जैन श्रीसंघ राजगढ़ के तत्वाधान में आचार्यदेवेश श्रीमद्विजय जयानन्दसूरीश्वरजी म.सा. आदि ठाणा एवं दादा गुरुदेव श्रीमद्विजय राजेन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. की पाट परम्परा के अष्ठम पट्टधर वर्तमान गच्छाधिपति आचार्यदेवेश श्रीमद्विजय ऋषभचन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. आदि ठाणा की पावनतम निश्रा में प्रभु श्री महावीर स्वामी भगवान की अंजनशलाका प्रतिष्ठा के चढ़ावों की द्वितीय जाजम का भव्य आयोजन श्री राजेन्द्र भवन में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ गुरुवार को हुआ। श्री राजेन्द्र भवन में चढ़ावों की जाजम बिछाने का लाभ राजगढ़ निवासी श्री मनीषकुमार प्रकाशचंदजी चाईस परिवार द्वारा लिया गया। प्रभु के मुनीम जी बनने के लाभार्थी श्री भूपेन्द्रकुमार घेवरमलजी कांकरिया की उपस्थिति में जाजम बिछाई गई और आचार्यद्वय ने जाजम पर वासक्षेप किया। तत्पश्चात् समाजजनों ने सामुहिक रुप से पाट पर विराजित दोनों आचार्य भगवन्तों को गुरुवंदन किया। आचार्यदेवेश श्रीमद्विजय जयानन्दसूरीश्वरजी म.सा. द्वारा मांगलिक का श्रवण कराया गया व मंगलाचरण आचार्यदेवेश श्रीमद्विजय ऋषभचन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. द्वारा फरमाया गया । इस मौके पर वर्तमान गच्छाधिपति आचार्यदेवेश श्रीमद्विजय ऋषभचन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. ने समाजजनों से कहा कि राजगढ़ नगर में प्रभु के पंचकल्याण महोत्सव 114 वर्षो के बाद होने जा रहे है। इससे पूर्व अष्टापद जिन मंदिर के समय प्रभु के पांच कल्याण का आयोजन हुआ था। राजगढ़ वासी इस प्रतिष्ठा महोत्सव में उत्साह पूर्वक भाग लेकर अपनी पूण्यानुबंधी लक्ष्मी का सदुपयोग करें। आचार्यश्री ने श्री महावीर जी मंदिर के इतिहास की जानकारी भी दी। इससे पूर्व 21 फरवरी की हुई जाजम में संगीतमय प्रस्तुति व चढ़ावें श्री देवेश जैन मोहनखेड़ा द्वारा सम्पन्न कराये गये। आज गुरुवार की हुई जाजम में हेमेन्त वेदमुथा मक्सी द्वारा संगीतमय प्रस्तुति के साथ द्वितीय जाजम के चढ़ावें करवाये गये। इस जाजम पर कार्यक्रम के प्रथम दिन नास्ता नवकारसी से लेकर जिन मंदिर में विराजित होने वाली प्रतिमाओं के चढ़ावें, मंदिर के द्वारों पर नाम लिखने का चढ़ावा, सत्तरभेदी पूजन, जल कलश यात्रा व पूजा विधानों के चढ़ावें सम्पन्न किये गये।

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