भोपाल। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद भोपाल से शुरू हुई महापौरों के अधिकारों की लड़ाई ने राजनीति को गरमा दिया है। मंगलवार को भाजपा के 13 महापौरों ने राजधानी में आमद दी। साथ ही मप्र महापौर परिषद के बैनर तले पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष राकेश सिंह व प्रदेश संगठन मंत्री सुहास भगत से मिलकर आपबीती सुनाई। दरअसल, बीते 21 फरवरी को मुख्यमंत्री युवा स्वाभिमान योजना के शुभारंभ कार्यक्रम के दौरान भोपाल के महापौर आलोक शर्मा ने प्रदेश सरकार पर प्रोटोकॉल का पालन न करने व अपमान का आरोप लगाया था। इसके साथ ही ग्वालियर व छिंदवाड़ा के महापौर को पद से हटाने नोटिस भी भेजा गया था। ऐसे मामलों के विरोध में मप्र महापौर परिषद के बैनर तले मंगलवार को पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के आवास पर बैठक हुई। बैठक में चौहान ने कहा कि कांग्रेस सरकार भाजपा के जनप्रतिनिधियों का अपमान कर रही है। उनके अधिकारी को कुचला जा रहा है। इस मामले पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने कहा कि अभी सरकार को ढाई माह भी पूरे नहीं हुए और भाजपा के लोग परेशान हो रहे हैं।

डेढ़ घंटे चली बैठक -  पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निवास पर प्रदेश के 11 महापौरों ने करीब डेढ़ घंटे तक बैठक की। बैठक में पहले निर्णय लिया गया कि आगामी 6 मार्च को शहर में भाजपा के सभी महापौर, नपा अध्यक्ष और पार्षद प्रदेश सरकार की नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे। बैठक में महापौर आलोक शर्मा ने कहा कि भाजपा के चुने गए जनप्रतिनिधियों को परेशान किया जा रहा है।


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