गोपाल राठौड़,पेटलावद। आरटीआई कार्यकर्ता श्रवण कुमार पिता भुवानीलाल मालवीय निवासी बामनिया ने एसडीएम हर्षल पंचोली को एक लिखित शिकायत पत्र सौंप कर बताया की ग्राम बामनिया में स्थित शासन की भूमि जिसे कि शासन के द्वारा कारखाना संचालित करने हेतु लीज पर दी गई थी. जिसके समीप मुक्तिधाम की भी भूमि को कुछ लोगों द्वारा कब्जा करते हुए संपूर्ण भूमि पर अवैधानिक तरीके से बिना सक्षम अनुमति व बिना डायवर्शन और बिना कालोनाईजर एक्ट का पालन करते हुए प्लाट कांटे कर अवैध रूप से निर्माण कार्य किया जा रहा है. लीज की शर्तो का उल्लंघन भी किया जा रहा है. वहीं आवेदन का कहना है कि वर्ष 1958 में भूमि के कब्जेदार व्यक्ति को किन आधारों पर राजस्व रेकार्ड में भूमि स्वामी बनाया गया है. इस बात की जांच टीम बनाकर की जाए. साथ ही मौके पर चल रहे निर्माण कार्य को रोका जाए तथा संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई की जाए. आवेदन में खुलासा किया गया कि सर्वे नंबर 65 और 66 स्थित है ज¨ की शासकीय भूमि है.जिसे वर्ष 1965-66 में शासन द्वारा जिनिंग फेक्ट्री चालू करने हेतु आवंटित करते हुए स्पेशल लीज देते हुए भूमि आवंटित की गई थी.

प्लाट कांट रहे है -
शासन द्वारा दी गई भूमि कारखाना खोलने हेतु आवंटित की गई थी ताकि आसपास के लोगो को रोजगार मिले किंतु भूमि का आवंटन प्राप्त करने वाले ने किसी प्रकार का कोई कारखाना नहीं खोला ओर अब इस भूमि को छोटे छोटे प्लाट के रूप में बेचा जा रहा है. जिसमें कालोनाईजर या रेरा एक्ट के तहत पंजीयन भी नहीं कराया गया है. लीज की भूमि को अवैध तरीके से विक्रय करते हुए शासन व राजस्व विभाग को क्षति पहुंचाते हुए करोड़ो रूपए का नुकसान पहुंचाया जा रहा है.

लीज के स्थान पर भूमि स्वामी बन गए -
आवेदक का कहना है कि शासकीय रेकाडर्ढ में गलत जानकारी देते हुए लीज गृहिता के स्थान पर खुद को भूमिस्वामी रेकार्ड में दर्ज करवा लिया गया है. और उस रेकार्ड के आधार पर भूमि बेची जा रही है.
वर्ष 1959-60 में राजस्व रेकार्ड में सर्वे नंबर 65 व 66 पर लीज दिखाई जा रही है तो इसके बाद के वर्षो में लीजधारी व्यक्ति कैसे मालिक बन गया. इसके लिए जांच की जाए.

लीज के अलावा चरनोई व मुक्तिधाम की भूमि पर भी कब्जा -
लीज की भूमि को तो अवैध तरीके से अपने नाम पर कर अवैध तरीके से बेचा जा रहा है. इसके साथ ही इस भूमि से लगी हुई चरनोई भूमि और मुक्तिधाम की भूमि पर भी कब्जा कर उस शासकीय भूमि को अपना बताकर उसे भी बेचा गया है. और भूमिधारक के द्वारा उस पर अवैध रूप से निर्माण किया जा रहा है.
आवेदक ने मांग की है कि उक्त भूमि को छुडवा कर ग्राम हित में शासकीय कार्यो के उपयोग हेतू उक्त भूमि का उपयोग किया जाए. उक्त भूमि आज दिनांक में करोडो की लागत रखती है. जिसके लिए शासन को अपनी भूमि पर कब्जा करना चाहिए.
आवेदक ने आवेदन के साथ अन्य दस्तावेज भी एसडीएम हर्षल पंचोली को सौंपे जिनके आधार पर भूमि शासकीय होना बताया जा रहा है.
इस संबंध में एसडीएम हर्षल पंचोली ने आवेदक को आश्वासन दिया है. कि उक्त शिकायत की जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी. यदि शासन की भूमि है तो उसे मुक्त करवाया जाएगा और कहीं नियमों का उल्लघन हुआ है तो कार्रवाई भी की जाएगी.

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