श्री मोहनखेड़ा तीर्थ/राजगढ़। दादा गुरुदेव की पाट परम्परा के सप्तम पटधर गच्छाधिपति आचार्यदेवेश श्रीमद्विजय रवीन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. के आज्ञानुवर्ती प.पू. भावी गच्छाधिपति आचार्यदेवेश ज्योतिष सम्राट श्री ऋषभचन्द्रविजयजी म.सा. की निश्रा और मालवकेसरी मुनिराज श्री हितेशचन्द्रविजयजी म.सा., कार्यदक्ष मुनिराज श्री पीयूषचन्द्रविजयजी म.सा., मुनिराज श्री दिव्यचन्द्रविजयजी म.सा., मुनिराज श्री रजतचन्द्रविजयजी म.सा., मुनिराज श्री चन्द्रयशविजयजी म.सा., मुनिराज श्री प्रीतियशविजयजी म.सा., मुनिराज श्री वैराग्ययशविजयजी म.सा., मुनिराज श्री जिनचन्द्रविजयजी म.सा., मुनिराज श्री जीतचन्द्रविजयजी म.सा. एवं इस अवसर पधारे प.पू. प्रवचनकार मुनिराज श्री पुष्पेन्द्रविजयजी म.सा., मुनिराज श्री रुपेन्द्रविजयजी म.सा. एवं साध्वी श्री किरणप्रभाश्री जी, साध्वी श्री सद्गुणाश्री जी म.सा., साध्वी श्री संघवणश्री म.सा., साध्वी श्री बसन्तबालाश्री जी म.सा. आदि ठाणा की सानिध्यता में दसई से पधारे श्रीसंघ अध्यक्ष पारसमल पावेचा, सचिव बाबुलाल मण्डलेचा, इन्दरमल पिपाड़ा, सुमती विलास सियाल, ललित मण्डलेचा, प्रवीण मण्डलेचा, ललित नाहर सहित दसई श्रीसंघ से 100 से अधिक सदस्यों ने मालवकेसरी मुनिराज श्री हितेशचन्द्रविजयजी म.सा. एवं मुनिराज श्री दिव्यचन्द्रविजयजी म.सा. के अगामी चातुर्मास हेतु भावी आचार्य श्री ऋषभचन्द्रविजयजी म.सा. से विनन्ती की गयी । भावी आचार्यश्री ने समाजजनों को कहा परमात्मा के शासन में जिन वाणी का बड़ा महत्व है और चातुर्मास के दौरान साधु साध्वी जिन वाणी का संदेश श्रद्धालु भक्तजनों को सत्संग के माध्यम से श्रवण कराते है और दसई क्षैत्र से हम परिचित है दसई में पिछले 20 वर्षो में काफी परिवर्तन, विकास व समृद्धि आयी है । जब नगरवासी चातुर्मास हेतु तैयार है तो हमारी स्वीकृति है पर उक्त चातुर्मास की विधिवत घोषणा 07 मई को होगी ।


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