गोपाल राठौड़ पेटलावद। क्षेत्र  में पेयजल समस्या ने अपने पैर पसारना प्रारंभ कर दिए है. ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की लिए जद्दोजहद प्रारंभ हो गई है.ग्रामीण पेयजल के लिए भटक रहे है. ग्राम पंचायतों के पास पर्याएेत संसाधन की कमी और आर्थिक परेशानियों के चलते ग्रामीणों की पेयजल समस्या का निदान नहीं हो पा रहा है.
कई ग्रामों में तो कृत्रिम पेयजल समस्या भी उत्पन्न हो रही है.वहीं कई गांवों में जमीनी पेयजल का स्तर काफी नीचे होने से उन्हें पेयजल की समस्या से जूझना पड़ता है.
इस प्रकार की समस्या से क्षेत्र की एक बड़ी पंचायत बेकल्दा के रहवासी भी जूझ रहे है. यह पंचायत क्षेत्र की जीवनदायी माही नदी पर बने विशाल डेम से मात्र 5 किमी दूर है किंतु यहां के बाशिंदों को पेयजल की समस्या से हर वर्ष दो चार होना पड़ता है.
माही डेम से नहरों के माध्यम से  30 हजार हेक्टयर भूमी सिंचित होती है.और 140 श्रलोराइड प्रभावीत गांवों में पेयजल उपलब्धता करवाई जा रही है. किंतु नदी व डेम से मात्र 5 किमी दूर के गांव के रहवासी पानी के लिए त्राही त्राही कर रहे है. इस का एक तकनीकी कारण यह है कि यह गांव डेम से अधिक उंचाई पर है और कम जनसंख्या के लिए प्रशासन लिश्रट एरिकेशन योजना नहीं लागू कर सकती है.
इनकी स्थिति चीराग तले अंधेरा की है. यहां के ग्रामीणों को 5 किमी दूर बह रही माही का पानी नहीं मिलता है. भीषण गर्मी में हर बार पेयजल की उपलब्धता इनके लिए एक विकट समस्या बन कर आती है. गांव के आसपास के एक या दो कुओं में पानी रहता है तो उसे बड़ी मशक्कत कर स्वयं के लिए पेयजल और पशुओं के लिए भी पानी की उपलब्धता करवाना एक बड़ी चुनौती बन जाता है.
ग्राम बेकल्दा के सोहन डामर का कहना है कि पेयजल की समस्या का सामना करना हमारी नियती बन गई है. ग्राम पंचायत द्वारा ग्राम में कुएं भी खुदवाए गए किंतु पानी उपलब्ध नहीं हो पाया.
वहीं ग्रामीण मोहन खड़िया का कहना है कि ग्राम से मात्र 5 किमी दूर माही नदी बहती है जहां एक बड़ा डेम बना हुआ है किंतु हमें उसका लाभ नहीं मिल रहा है. शासन को चाहिए की आसपास के रहवासियों को भी माही का पानी उपलब्ध करवाएं ताकि हमारी पेयजल की समस्या हल हो सकें.

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