बामनिया से सुमित राठौर। इस संसार में जिसने भी जन्म लिया है उसे एक दिन जाना होगा। यही विधि का विधान है और साश्वत सत्य भी है। श्रीमद् भागवत कथा पुराण में राजा परीक्षित मोक्ष वृतांत के सातवें दिवस की कथा पर प.श्री बालमुकुंद जी ठाकुर के सान्निध्य में खेड़ापति हनुमान धाम पर कथा वाचन करते हुए कहा कि राजा परीक्षित को लगा श्राप किसी एक व्यक्ति को नहीं लगा है यह तो समस्त मानव जाति को है क्योंकि परीक्षित को जो श्राप लगा था उसमें स्पष्ट रूप से कहा गया था आज के सातवें दिन तक्षक नामक नाग के काटे जाने से मृत्यु होगी, यानि 7 दिन में मृत्यु होना निश्चित है और प्रत्येक मनुष्य की मृत्यु भी 7 दिनों में ही होती है। यह श्राप समस्त मानव जाति को है। श्रीमद् भागवत कथा पुराण के श्रवण से मनुष्य अपने जन्म जन्मांतर के पाप नष्ट करता है और भगवान की विभिन्न लीलाओं का वर्णन एकाग्र भाव से सुनकर मन को स्थर करते हुए अगर इस कथा को ध्यान से सुनता है तो निश्चित रूप से उसे स्वर्ग की प्राप्ति होती है।
  प. श्री ने कहा कि भगवान तो गरीब निवाज हैं जिसने सुदामा जैसे अकिंचन ब्राह्मण को अपने सिंहासन पर आसीन किया। आज के भी शासक यदि दीन-उत्पीड़ितों की सेवा करें तो स्वर्णिम समाज का निर्माण होगा। ज्ञानियों की स्थिति सासारिक प्रपंचो से दूर रहती है। वे समस्त संसार को ब्रह्ममय देखते हैं और सर्वदा उनके हृदय विश्वात्म की भावना रहती है। उनका तो सारा संसार ही परिवार होता है। कृष्ण सुदामा की झांकी देख कर भजनों पर पर श्रद्धालु झूमने लगे। प.श्री ठाकुर जी कथा विश्राम से पहले उपस्थित सभी श्रोताओं से एक श्लोक वाचन करवाया जिसके वाचन से सात दिन की भागवत कथा का पूर्ण लाभ प्राप्त होता है।
 

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